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Paryushan Parv 2022: जैन समाज का पर्युषण पर्व आरंभ, जानें क्यों और कैसे मनाया जाता है ये त्योहार

Wed, 24 Aug 2022 06:57 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्यों और कैसे मनाया जाता है पर्युषण पर्व - फोटो : अमर उजाला
Paryushan Parv 2022: कल यानी 24 अगस्त से जैन धर्म का प्रमुख पर्व पर्युषण शुरू हो रहा है। ये पर्व लगातार दस दिनों तक चलता है। ये पर्व भाद्रपद मास की पंचम तिथि से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तिथि तक मनाया जाता है। इस साल जैन समाज का ये महापर्व 24 अगस्त से शुरू हो रहा है, जो कि 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा। पर्युषण को जैन धर्म के लोग काफी महत्वपूर्ण त्योहार मानते हैं। जैन धर्म में पर्युषण को पर्वों का राजा कहा जाता है। ये पर्व भगवान महावीर स्वामी के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म, जिओ और जीने दो की राह पर चलना सिखाता है। साथ ही मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है। इस महापर्व के जरिए जैन धर्म के अनुयायी उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम ब्रह्मचर्य के जरिए आत्मसाधना करते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं जैन धर्म के इस प्रमुख पर्व के बारे में खास बातें... 
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क्यों और कैसे मनाया जाता है पर्युषण पर्व - फोटो : iStock
पर्युषण पर्व की अवधि 
जैन धर्म में पर्युषण को दशलक्षण के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, जैन धर्म में दो क्षेत्र हैं। एक दिगंबर और दूसरा श्वेतांबर। श्वेतांबर समाज 8 दिन तक इस त्योहार को मनाते हैं, जिसे अष्टान्हिका कहा जाता है। वहीं दिगंबर समाज जैन दस दिन तक पर्युषण पर्व को मनाते हैं, जिसे दसलक्षण कहते हैं। इस दौरान लोग ईश्वर के नाम पर उपवास करते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।
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क्यों और कैसे मनाया जाता है पर्युषण पर्व - फोटो : iStock
कैसे रखते हैं पर्युषण का उपवास?
जैन धर्म में उपवास यानी व्रत पर्युषण पर्व का एक महत्वपूर्ण अंग है। हिंदू धर्म के नवरात्रि की तरह ही ये त्योहार मनाया जाता है। शक्ति और भक्ति के अनुसार केवल एक दिन या उससे अधिक की अवधि तक व्रत रखा जा सकता है। वहीं सूर्यास्त के बाद वो भोजन नहीं करते हैं। 

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प्रभातफेरी निकालते जैन धर्म के लोग।
पर्युषण पर्व की मुख्य बातें जैन धर्म के पांच सिद्धांतों पर आधारित हैं। जैसे- अहिंसा यानी किसी को कष्ट ना पहुंचाना, सत्य, चोरी ना करना, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यानी जरूरत से ज्यादा धन एकत्रित ना करना। 
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क्यों और कैसे मनाया जाता है पर्युषण पर्व - फोटो : Facebook
मान्यताओं के अनुसार, पर्युषण पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबी धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं। पर्व के दौरान कुछ लोग व्रत भी रखते हैं। पर्युषण पर्व के दौरान दान करना सबसे ज्यादा पुण्य का काम माना जाता है। 
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