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ओणम त्यौहार 2019 : जानें इस महापर्व का महत्व

Thu, 05 Sep 2019 04:44 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क,अमर उजाला
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- फोटो : ani

भारतीय परंपरा काफी अनोखी और अद्भुत है। भारत को युं ही त्योहारों की भूमि नहीं कहा जाता है। आज हम आपको दक्षिण भारत के केरल राज्य में होने वाले एक त्योहार के बारे मे बताएंगे, जिसकी केरल में अलग ही धूम है। बड़े ही धूम-धाम से यह त्यौहार मनाया जाता है। इस त्यौहार को ओणम बोला जाता है।

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- फोटो : amar ujala

यह त्यौहार केरल के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण और विशेष है। वैसे इस त्यौहार की धूम देश के हर कोने में है, परंतु केरल में इसका अपना विशेष महत्व है।यह त्यौहार 1 सितंबर से शुरू हो गया है और इसकी धूम 13 सितंबर तक रहेगी।ओणम इसलिए भी विशेष है की इस त्यौहार को मंदिर मे नहीं घर में ही मनाया जाता है।परंपरा अनुसार इस त्यौहार में घर में ही पूजा अर्चना का विधान है। 

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इस महापर्व के पीछे पौराणिक मान्यता है कि केरल में एक असुर राजा था महाबली नाम का उसके आदर सत्कार में ओणम त्यौहार मनाया जाता है। अच्छी फसल और उपज के लिए भी ओणम का त्यौहार मनाने की मान्यता है। 

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इस माह वैसे तो देश में हर जगह मौसम सुहावना होता है।  परंतु केरल में इस समय काफी हरियाली रहती है। लोगों में एक नई उमंग होती है,नया उत्साह रहता है। नई फसलों का स्वागत होता हैं। फूलो की देवी का पूजन हर घर में किया जाता हैं और फूलों से हर घर को सजाया जाता है। इन दिनों घर में विशेष साफ़-सफाई के बाद घर में ही गोलाकार आकर में एक फूल गृह बनाया जाता है।

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ओणम के दिनों में घर में लज़ीज़ व्यंजन बनाने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। भोजन को कदली के पत्तो में परोसा जाता है। पचड़ी–पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर  बनाया जाता है।केले और पापड़ के चिप्स भी बनाए जाते हैं।दूध की खीर बनाने का विशेष महत्व है। कही स्थानों पर अठारह प्रकार के दुग्ध पकवान बनाने की परंपरा भी है।

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ओणम पर्व की लोकप्रियता इस स्तर तक है कि इस पर्व को केरल की सरकार पर्यटक त्यौहार के रूप में मनाती है। इन दिनों केरल की सांस्कृतिक धरोहर देखते ही बनती है। नावस्पर्धा, नृत्य, संगीत, महाभोज आदि कार्यक्रमों से इन दिनों केरल की भूमि जीवंत हो उठती है। ओणम भारत के सबसे रंगारंग त्योहारों में से एक है।

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