ओणम के दिनों में घर में लज़ीज़ व्यंजन बनाने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। भोजन को कदली के पत्तो में परोसा जाता है। पचड़ी–पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर बनाया जाता है।केले और पापड़ के चिप्स भी बनाए जाते हैं।दूध की खीर बनाने का विशेष महत्व है। कही स्थानों पर अठारह प्रकार के दुग्ध पकवान बनाने की परंपरा भी है।
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