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नवरात्रि का नौवां दिन, जानें पूजा की खास बातें

Sun, 09 Oct 2016 10:59 AM IST
आशुतोष वार्ष्णेय
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महागौरी
नवरात्र का आज नवां द‌िन है लेक‌िन अष्टमी त‌िथ‌ि होने के कारण आज देवी के आठवें रूप महागौरी की पूजा हो रही है। इस दिन महागौरी की आराधना से सोम चक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां भक्तों को प्राप्त हो जाती है। महागौरी की उत्पत्ति की कथा मां पार्वती से ही जुड़ता है। कथा अनुसार पार्वती के रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की थी। इस कठोर तप के कारण उनकी देह क्षीण और वर्ण काला पड़ गया।

अंत में इनकी तपस्या से संतुष्ट होकर जब भगवान शिव ने इन्हें अपनी जटा से निकलती पवित्र गंगाधारा के जल से धोया तो यह विद्युत प्रभा के समान अति कांतिमान और गौर वर्ण की हो गईं, तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा। देवी दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस पर विजय पाई, इसलिए अष्टमी के दिन देवी दुर्गा के गौरी रूप की पूजा होती है। इनकी पूजा विवाहित महिलाओं को विशेष फल प्रदान करती हैं।
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ऐसे करें महागौरी की पूजा 

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Durga Pooja in Noida - फोटो : लाल सिंह
अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग और सुख-संपदा के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करें और विधिवत पूजा करें। इसके बाद हाथ में सफेद फूल लेकर मां का ध्यान करें और मंत्र का जाप करें। पूजा के समय देवी स्थान को तोरण और विविध प्रकार के मांगलिक पत्र-पुष्प से सजाना चाहिए तथा स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन उनके नाम मंत्रों द्वारा षोडशोपचार पूजन करना चाहिए, जो विशेष फलदायक होता है। मां का ध्यान इस मंत्र से करें, 
श्वेत हस्ति समारूढ़ा, श्वेताम्बर धरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्याद् महादेव प्रमोददा।।
मां का शास्त्रीय विधि से पूजन करने वाले सभी रोगों से मुक्त हो जाते हैं। भगवती जगदंबा का पूजन कर रात्रि का जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करना चाहिए। अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कन्याओं की संख्या 9 होनी चाहिए या फिर 2 कन्याओं की पूजा करें। कन्याओं की आयु 2 साल से ऊपर और 10 साल से अधिक न हो। भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा देनी चाहिए।
 
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अष्टमी पूजन का महत्व

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ओलंदगंज फलवाली गली में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा।
अष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा और आराधना ठीक उसी प्रकार कल्याणकारी है, जिस प्रकार अंधेरे में घिरे हुए संसार के लिए भगवान सूर्य की एक किरण। नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभबेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल प्रदान करती है। इनकी आराधना से शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के रोग, शोक, व्याधि आदि का अंत हो जाता है। इनका शक्ति विग्रह भक्तों को तुरंत और अमोघ फल देता है। इनकी उपासना से भक्त के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मार्ग से भटका हुआ भी सन्मार्ग पर आ जाता है। इनकी कृपा से साधक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। उसे अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। 
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अष्टमी के द‌िन जरूर करें यह काम

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दुर्गा पूजा
मां गौरी को सफेद रंग पसंद है, इसलिए इस दिन सभी को सफेद वस्‍त्र पहनना चाहिए और देवी को सफेद फूल (बेली, चमेली) की माला चढ़ानी चाहिए। अष्टमी के दिन महागौरी को नारियल चढ़ाने से हर प्रकार की पीड़ा का शमन होता है।
 
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