शारदीय नवरात्रि के छह दिन बीतते ही मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय पर विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए भी देवी की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भक्त मां को प्रिय पुष्प और भोग अर्पित करके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा विधि, शुभ रंग, प्रिय भोग, मंत्र, पौराणिक कथा और आरती।
मां कात्यायनी का स्वरूप कैसा है?
मां कात्यायनी सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल और तलवार सुशोभित हैं, जबकि अन्य दो हाथ वर मुद्रा और अभय मुद्रा में रहते हैं। देवी का यह स्वरूप भक्तों को साहस, निर्भयता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।