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Navratri Puja Samagri 2020: जानिए नवरात्रि में देवी की पूजा में काम आने वाली इन छह चीजों का महत्व

Wed, 07 Oct 2020 10:57 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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navratri 2020 - फोटो : अमर उजाला
Navratri Puja Samagri 2020:17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहे हैं। नवरात्रि के पावन नौ दिनों में दुर्गा माँ के नौ स्वरूपों की पूजा बड़े चाव और धूमधाम से की जाती है। ममतामयी देवी का आशीर्वाद पाने के लिए हर कोई अपने-अपने तरीके से व्रत,पूजा करके माँ को प्रसन्न करता है। देवी पर तरह-तरह की सामग्री चढ़ाई जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं दुर्गा माँ के पूजन-अर्चन में प्रयुक्त होने वाली प्रत्येक पूजा सामग्री का प्रतीकात्मक महत्व होता है और हर एक सामग्री के पीछे कोई न कोई उद्देश्य या संदेश जुड़ा हुआ है।
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KALASH STHAPNA
मंगल कलश
Navratri Puja Vidhi: 
पुराणों में कलश को सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों एवं तीर्थों का निवास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा,विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों एवं तैतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व) जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इसलिए पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए।
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navratri 2020
हरे-हरे जवारे
नवरात्रि पूजा के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोना बेहद शुभ माना गया है। हरे-हरे जौ समृद्धि,शांति,उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। माना जाता है कि अगर जौ तेज़ी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है वहीं अगर ये बढ़ते नहीं और मुरझाए हुए रहते हैं तो भविष्य में किसी तरह के अनिष्ट का संकेत देते हैं।

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navratri 2020
शुभ की बंदनवार
वैदिक काल से ही किसी भी शुभकार्य या पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेशद्वार पर आम या अशोक के ताज़े हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी पूजा के प्रथम दिन देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी होती हैं। देवी घर में प्रवेश करती हैं, पर बंदनवार लगी होने के कारण तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।
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जगमग करता दीपक
अग्नि ईश्वर का ही रूप है। दुर्गा माँ की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। अखंड दीप को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है। आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। दीपक,साधना में सहायक तृतीय नेत्र और हृदय ज्योति का प्रतीक है। इससे हमें जीवन के उर्ध्वगामी होने ,ऊंचा उठने और अन्धकार को मिटा डालने की प्रेरणा मिलती है।
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गुड़हल का पुष्प
लाल गुड़हल का फूल
सुर्ख लाल रंग का यह पुष्प अति कोमल होने के साथ ही असीम शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है,इसलिए लाल गुड़हल माँ भगवती को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक मान्यता है कि गुड़हल के पुष्प अर्पित करने से देवी प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
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kalash - फोटो : social media
नारियल
नारियल के बाहरी आवरण को अहंकार का प्रतीक और आंतरिक भाग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। माँ दुर्गा के समक्ष नारियल को तोड़ने का तात्पर्य अहंकार को तोडना है। नवरात्रि पूजा में कलश के ऊपर नारियल पर लाल कपडा और मोली लपेटकर रखने का विधान है। माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
 
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