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मीना में शैतान को पत्थर मारने की परंपरा के पीछे ये है राज

Tue, 13 Sep 2016 01:44 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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श्‍ाैतान
साल 2015 में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा के दौरान भगदड़ मचने की वजह से सैकड़ों लोगों की मौत हो गयी। इसस पहले भी हज यात्रा के दौरान मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा को न‌िभाने के दौरान इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। आइये जानें इसके पीछे क्या राज है।
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मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा के पीछे ये है राज

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मीना
इस्लाम‌िक व‌िषयों के जानकार रामीश स‌िद्द‌ीकी का कहना है क‌ि यह परंपरा हजारों साल पहले शुरू हुई थी। ज‌िस प्रकार बकरीद में प्रतीकात्मक रूप में बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसी तरह मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की प्रत‌ीकात्मक परंपरा है।
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मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा के पीछे ये है राज

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हज
इस परंपरा के पीछे हजरत इब्राह‌िम और उनके बेटे इस्माइल की कहानी है। हजरत इब्राह‌िम से जब अल्लाह ने उनके बेटे की कुर्बानी मांगी तो उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने के फैसला क‌िया।

मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा के पीछे ये है राज

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मीना
शैतान उन्हें खुदा की राह से भटकाना चाहता था इसी‌ल‌िए कह रहा था क‌ि यह कैसा खुदा है जो तुमसे तुम्हारा बेटा मांग रहा है। ऐसे समय में हजरत इब्राह‌िम ने एक पत्‍थर उठाकर शैतान को मारकर भगा द‌िया।
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मीना में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा के पीछे ये है राज

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मीना
जहां पर हजरत साहब ने शैतान को पत्‍थर मारा था वहां एक स्तंभ है ज‌िसे शैतान मानकर आज भी उसी परंपरा को न‌िभाने के ल‌िए तीर्थयात्री पत्‍थर मारते हैं।
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