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Mauni Amavasya Katha: मौनी अमावस्या पर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा भगवान विष्णु का आशीर्वाद

Sat, 25 Jan 2025 11:52 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी, बुधवार को है। इस अवसर पर पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। गृहस्थ और साधु-संन्यासी इस दिन व्रत और पूजा करते हैं। मौनी अमावस्या की कथा सुनने से व्रत की पूर्णता और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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मौनी अमावस्या व्रत कथा - फोटो : Amar Ujala
Mauni Amavasya Katha: हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का अत्यधिक महत्व है। इस साल यह तिथि 29 जनवरी को है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य कार्यों से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा में वर्णन है कि गुणवती नामक महिला के पति की रक्षा के लिए सोमा धोबिन ने अपने संचित पुण्य दान कर दिए, जिससे गुणवती के पति का जीवन बच गया।

इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी, बुधवार को है। इस अवसर पर पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। गृहस्थ और साधु-संन्यासी इस दिन व्रत और पूजा करते हैं। मौनी अमावस्या की कथा सुनने से व्रत की पूर्णता और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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मौनी अमावस्या व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, कांचीपुरी में देवस्वामी नामक ब्राह्मण और उनकी पत्नी धनवती का एक परिवार था। उनके सात बेटे और गुणवती नामक एक बेटी थी। ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की कि गुणवती के विवाह के बाद उसका पति मृत्यु को प्राप्त करेगा। इस भविष्यवाणी से परेशान देवस्वामी ने उपाय जानने के लिए ज्योतिषी की सलाह ली।

ज्योतिषी ने बताया कि सिंहल द्वीप में रहने वाली पतिव्रता महिला, सोमा धोबिन, अपने पुण्य दान करके इस दोष को समाप्त कर सकती हैं। देवस्वामी ने गुणवती को उसके छोटे भाई के साथ सोमा धोबिन के पास भेजा। यात्रा के दौरान दोनों समुद्र किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे रुके। वहां गिद्ध परिवार की मदद से वे समुद्र पार करके सोमा धोबिन के घर पहुंचे।

गुणवती ने सोमा धोबिन के घर के कार्यों में सहायता की और अपनी समस्या बताई। इसके बाद सोमा ने गुणवती के घर जाकर उसकी शादी के दिन पूजा-पाठ करके अपने पुण्य गुणवती को दान कर दिए। इससे गुणवती के पति का जीवन बच गया।

सोमा ने भी भगवान विष्णु की पूजा और 108 परिक्रमा की, जिससे उनके पति और बेटे की अकाल मृत्यु टल गई। यह कथा सिखाती है कि मौनी अमावस्या पर व्रत, दान, और भगवान विष्णु की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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