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Masik Shivratri 2025: अगस्त में कब रखा जाएगा मासिक शिवरात्रि का व्रत ? जानें तिथि और पूजा विधि

Wed, 06 Aug 2025 04:10 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Masik Shivratri 2025: हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा को समर्पित है। 
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Masik Shivratri 2025 - फोटो : Amar Ujala
Masik Shivratri 2025: हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा को समर्पित है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि पर शिव पूजन करने से भक्तों की सभी समस्याएं दूर और भाग्योदय होता है। इसके अलावा शिवलिंग का जलाभिषेक करने पर भक्तों को करियर, व्यापार, शिक्षा में मनचाहे परिणाम मिलते हैं। हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि को महाकाल की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है। इस तिथि पर निशाकाल में प्रभु की आराधना से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। साथ ही प्रेम जीवन सुखमय बनता है। वर्तमान में अगस्त माह जारी है और इस माह में यह व्रत कब रखा जाएगा, आइए जानते हैं।
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Masik Shivratri 2025 - फोटो : freepik
अगस्त 2025 की मासिक शिवरात्रि ?
इस साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर शुरू हो रही है। तिथि का समापन 22 अगस्त को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर है। ऐसे में 21 अगस्त 2025 को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। हालांकि यह अगस्त और भाद्रपद दोनों माह की पहली मासिक शिवरात्रि होगी।
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Masik Shivratri 2025 - फोटो : freepik
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
  • मासिक शिवरात्रि पर पूजा के लिए आप सबसे पहले सुबह ही स्नान कर लें। फिर एक साफ चौकी पर शिव-पार्वती की तस्वीर रखें।
  • अब शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाएं। अब देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। इसके बाद आप महादेव को मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा का पाठ करें। अंत में शिव जी की आरती करें और क्षमतानुसार दान करें।

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Masik Shivratri 2025 - फोटो : Amar Ujala
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
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Masik Shivratri 2025 - फोटो : Instagram
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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