Masan holi 2026
- फोटो : अमर उजाला
क्या है पौराणिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी पधारे थे। इस अवसर पर देवताओं ने गुलाल के साथ हर्षोल्लास से होली खेली। किंतु शिव के गण-भूत, प्रेत, अघोरी और अन्य श्मशानवासी भक्त—इस उत्सव में सम्मिलित नहीं हो सके। कहा जाता है कि अपने इन प्रिय गणों को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने अगले दिन श्मशान में चिता की भस्म से होली खेली। तभी से काशी में मसान होली की परंपरा चली आ रही है, जो शिव के अघोर और वैराग्य स्वरूप की प्रतीक मानी जाती है।