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महाशिवरात्रि 2020: मंदिर के गर्भगृह के बाहर शिवलिंग और आधी परिक्रमा क्यों? कुछ रोचक जानकारियां

Thu, 06 Feb 2020 03:52 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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सत्य के शिव
21 फरवरी 2020 को महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2020) का पर्व है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2020) मनाई जाती है। महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2020) का त्योहार शैव उपासको के लिए सबसे बड़ा पर्व है। महाशिवरात्रि के मौके पर आइए जानते हैं शिव जी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां...
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shiv temple
शिव भोलेनाथ क्यों?
भगवान शिव को कई नामों से पुकारा और पूजा जाता है। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है। भोलेनाथ यानी जल्दी प्रसन्न होने वाले देव। भगवान शंकर की आराधना और उनको प्रसन्न करने के लिए विशेष साम्रगी की जरूरत नहीं होती है। भगवान शिव जल, पत्तियां और तरह -तरह के कंदमूल को अर्पित करने से ही जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। बेलपत्र भगवान शिव को विशेषरूप से प्रिय होती है। 
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shiv temple
शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों?
शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जल चढ़ाने के बाद लोग शिवलिंग की परिक्रमा करते हैं। शास्त्रों में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने के बारे में कहा गया है। शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा जलाधारी के आगे निकले हुए भाग तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौट दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें। इसे शिवलिंग की आधी परिक्रमा भी कहा जाता है।

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shiv temple
शिवलिंग मंदिर के बाहर क्यों ?
आपने देखा होगा सभी मंदिरों में शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में नहीं बल्कि बाहर होते हैं। भगवान शिव ऐसे अकेले देव हैं जो गर्भगृह में नहीं होते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों का विशेष ध्याल रखते हैं उनके दर्शन दूर से ही सभी लोग जिसमें बच्चे, बूढ़े, आदमी और महिलाएं सभी कर सकते हैं। भगवान शिव थोड़े से जल चढ़ाने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
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nandi
शिवलिंग की ओर नंदी का मुंह क्यों?
किसी भी शिव मंदिर में पहले हमें शिव के वाहन नंदी के दर्शन होते हैं। शिव मंदिर में नंदी का मुंह शिवलिंग की ओर होता है। आखिर नंदी शिवलिंग की ओर ही मुख करके क्यों बैठा होता है? नंदी शिवजी का वाहन है। नंदी की नजर अपने आराध्य की ओर हमेशा होती है। नंदी के बारे में यह भी माना जाता है कि यह पुरुषार्थ का प्रतीक है।
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शिव बेलपत्र
शिवजी को बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं?
विष के प्रभाव से शिव जी का मस्तिष्क गर्म हो गया। ऐसे समय में देवताओं ने शिव जी के मस्तिष्क पर जल उड़लेना शुरू किया जिससे मस्तिष्क की गर्मी कम हुई। बेल के पत्तों की तासीर भी ठंढ़ी होती है इसलिए शिव जी को बेलपत्र भी चढ़ाया गया। इसी समय से शिव जी की पूजा जल और बेलपत्र से शुरू हो गयी।

बेलपत्र और जल से शिव जी का मस्तिष्क शीतल रहता और उन्हें शांति मिलती है। इसलिए बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले पर शिव जी प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि की कथा में प्रसंग है कि, शिवरात्रि की रात में एक भील शाम हो जाने की वजह से घर नहीं जा सका।

उस रात उसे बेल के वृक्ष पर रात बितानी पड़ी। नींद आने से वृक्ष से गिर न जाए इसलिए रात भर बेल के पत्तों को तोड़कर नीचे फेंकता रहा। संयोगवश बेल के वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। बेल के पत्ते शिवलिंग पर गिरने से शिव जी प्रसन्न हो गये। शिव जी भील के सामने प्रकट हुए और परिवार सहित भील को मुक्ति का वरदान दिया।
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