संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो शिव के बिना हो। सृष्टि का आधार ही शिव है। यदि रात शिव है, तो दिन भी शिव है। सुख शिव है, तो दुख भी शिव है। देवों के देव शिव का स्वरूप चैतन्य है। शिव ही आदि हैं और वही अनंत हैं। वे योगी हैं, तो गृहस्थ जीवन के आदर्श भी। क्या स्त्री, क्या पुरुष... हर किसी के पूज्य हैं भगवान शिव। वह संहारकर्ता भी हैं और सृष्टि के रचनाकार भी। भगवान शिव असीम हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं, अविकारी हैं, निराकार हैं। जिसका व्यक्तित्व इतना विशाल हो, तो फिर मनुष्य उनसे प्रभावित तो होगा ही।