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Maha Shivratri 2026: शिवलिंग पर ये 5 चीजें चढ़ाना है वर्जित, हो सकता है नुकसान

Mon, 09 Feb 2026 07:33 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करना आवश्यक माना गया है। शिवलिंग पर कुछ सामग्रियों को अर्पित करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है, जिनका प्रयोग करने से पूजा का फल कम हो सकता है। इसके साथ ही व्रत रखने, पूजा की विधि और आचरण से जुड़े नियमों का पालन करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं।
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महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala
What to Offer to Lord Shiva: महाशिवरात्रि केवल उपवास या पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का पावन उत्सव है। हिंदू मान्यताओं में इस पर्व का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में 15 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि भक्तों के लिए और भी खास रहने वाली है, क्योंकि पंचांग और वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस दिन कई दुर्लभ और शक्तिशाली योगों का निर्माण हो रहा है। ऐसे योगों में की गई पूजा, तप और भक्ति का फल कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए यह शिवरात्रि अत्यंत फलदायी मानी जा रही है।
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इस शुभ अवसर पर शिव भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। साथ ही कुछ विशेष पूजन सामग्रियां अर्पित की जाती हैं, जिन्हें भोलेनाथ अत्यंत प्रिय मानते हैं। हालांकि शास्त्रों में कुछ ऐसी वस्तुओं का भी उल्लेख है, जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन क्या अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, किन चीजों से दूरी रखनी चाहिए और इस दिन से जुड़े कौन-से विशेष नियमों का पालन करना जरूरी है, यह जानना हर भक्त के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है।
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शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूर्णतः वर्जित है। - फोटो : Adobe Stock
शिव पूजन में शंख का प्रयोग वर्जित
शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूर्णतः वर्जित है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था और उसके शरीर की अस्थियों से शंख उत्पन्न हुआ। इसी कारण से शिवलिंग पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता। शिवलिंग पर जल, दूध, दही या अन्य पवित्र द्रव सीधे पात्र से अर्पित करना ही शास्त्रानुसार सही माना गया है।
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शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है।
शिवलिंग की परिक्रमा का विधान
सामान्य देवी-देवताओं की मूर्तियों की पूरी परिक्रमा की जाती है, लेकिन शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिक्रमा करते समय जलाधारी या सोमसूत्र को कभी भी पार नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इसी मार्ग से शिव की दिव्य ऊर्जा प्रवाहित होती है, इसलिए इसका सम्मान करना आवश्यक है।

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शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित नहीं की जातीं। - फोटो : adobe stock
हल्दी और श्रृंगार सामग्री से परहेज
भगवान शिव को वैराग्य और तप का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित नहीं की जातीं। यदि माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र पूजा के लिए स्थापित हो, तो वहां इन सुहाग सामग्री का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर इसे बिल्कुल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए।
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भगवान शिव को यह अर्पण अत्यंत प्रिय होता है। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि
बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन तीन पत्तों वाला अखंड और बिना कटा-फटा बेलपत्र ही शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र का चिकना और साफ हिस्सा हमेशा शिवलिंग की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव को यह अर्पण अत्यंत प्रिय होता है और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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फूल और पत्ते शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते। - फोटो : freepik
पूजन सामग्री से जुड़े विशेष नियम
शिवपुराण में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कुछ फूल और पत्ते शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते। इनमें केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्ते शामिल हैं। इसके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्ते अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये सामग्री शिवजी को प्रिय है और पूजा में पूर्णता लाती है।
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अक्षत हमेशा साफ, साबुत और पूर्ण होना चाहिए। - फोटो : Adobe stock
अक्षत (चावल) का नियम
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर अर्पित अक्षत हमेशा साफ, साबुत और पूर्ण होना चाहिए। टूटे या खंडित चावल (खंडित अक्षत) अर्पित करना वर्जित है, क्योंकि इससे पूजा अधूरी मानी जाती है। शुद्ध और साबुत अक्षत श्रद्धा और पूजा की पूर्णता का प्रतीक है।
इन सभी नियमों का पालन करके की गई शिव पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से सही मानी जाती है, बल्कि इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के पावन दिन पर इन नियमों के अनुसार पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा अवश्य प्राप्त होती है और भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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