Kanha ji Chhati: जैसे किसी नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन घर में छठी पूजा की जाती है, उसी भावना के साथ बालगोपाल की भी यह रस्म मनाई जाती है। सनातन परंपरा के अनुसार, छठे दिन शिशु की शुद्धि व संरक्षण के लिए विशेष पूजा की जाती है, और उसी भावना से लड्डू गोपाल के लिए भी खास पकवान बनाए जाते हैं।
Laddu Gopal Chhathi: हर वर्ष जन्माष्टमी के छह दिन बाद लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है, और इस बार यह शुभ दिन 21 अगस्त 2025 को पड़ रहा है। जैसा कि भक्तजन लड्डू गोपाल को अपने घर के बालकृष्ण के रूप में मानते हैं, वैसे ही उनकी सेवा-सुश्रुषा भी एक नन्हे बालक की तरह ही की जाती है। ठीक वैसे ही जैसे किसी नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन घर में छठी पूजा की जाती है, उसी भावना के साथ बालगोपाल की भी यह रस्म मनाई जाती है। सनातन परंपरा के अनुसार, छठे दिन शिशु की शुद्धि व संरक्षण के लिए विशेष पूजा की जाती है, और उसी भावना से लड्डू गोपाल के लिए भी खास पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन कढ़ी चावल प्रमुख रूप से बनाए जाते हैं क्योंकि बेसन और दही से बना यह भोजन शीतल और सात्त्विक माना जाता है। Krishna Ji Ki Chhathi 2025: कान्हा जी की छठी आज, जानें पूजन विधि और महत्व
आइए जानते हैं कि लड्डू गोपाल की छठी पर कढ़ी-चावल के साथ और किन वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए, जिससे पूजा पूर्ण हो और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त हो। Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज पर सिर्फ भोलेनाथ ही नहीं, इन देवताओं की आराधना से भी मिलता है शुभ फल
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kadhi chawal
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कढ़ी चावल
छठी के दिन लड्डू गोपाल को कढ़ी चावल का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इस विशेष दिन पर तैयार की गई कढ़ी में प्याज-लहसुन का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता। केवल घर के शुद्ध मसालों से कढ़ी बनाई जाती है। मान्यता है कि दही और बेसन से बनी यह कढ़ी शरीर को ठंडक देती है और सात्त्विक भोजन का प्रतीक मानी जाती है।
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makhane ki kheer
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मखाने की खीर
छठी के दिन मखाने की खीर भी भगवान को अर्पित की जाती है। यह खीर लड्डू गोपाल को विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। मखाने को दूध और थोड़े से मेवे के साथ पकाकर यह स्वादिष्ट और सात्त्विक भोग बनाया जाता है।
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Dhania Panjiri
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धनिया की पंजीरी
धनिया पंजीरी लड्डू गोपाल के पसंदीदा भोगों में से एक है। इसे देशी घी, गुड़ और सूखे धनिये से तैयार किया जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पौष्टिक भी होती है, इसलिए इसे छठी के भोग में जरूर शामिल किया जाता है।
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makhan mishri
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माखन मिश्री
बाल स्वरूप श्रीकृष्ण को माखन मिश्री अत्यंत प्रिय है। बचपन की लीलाओं में उनका माखन चुराना प्रसिद्ध है, इसलिए छठी के दिन यह भोग ज़रूर अर्पित किया जाता है। यह प्रेम और मासूमियत का प्रतीक भी है।
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panchmeva
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पंचमेवा
छठी के भोग में पंचमेवा, यानी पाँच तरह के सूखे मेवे (बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, पिस्ता) का भोग भी शामिल करना चाहिए। यह भगवान को समृद्धता और पूर्णता के साथ अर्पण करने का प्रतीक माना जाता है।
पीले रंग के वस्त्र पहनें, क्योंकि यह भगवान कृष्ण का प्रिय रंग है।
लड्डू गोपाल की मूर्ति को गुनगुने पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर स्नान कराएं।
स्नान के बाद उनकी सुंदर सजावट करें और पीले वस्त्र पहनाएं।
सुबह दूध, माखन और मिश्री का भोग अर्पित करें।
शाम को कढ़ी, चावल, मखाने की खीर, धनिया पंजीरी, माखन मिश्री आदि भोग के रूप में तैयार करें।
घी का दीपक जलाएं और भगवान कृष्ण के भजन या कीर्तन करें।
आरती करें और लड्डू गोपाल को झूले में झुलाएं।
दीपक की राख से काजल बनाएं और पहले लड्डू गोपाल को लगाएं।
फिर परिवार के सभी सदस्यों को काजल लगाएं, यह शुभ और सुरक्षा का संकेत होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।