भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 2 सितंबर की रात्रि को 8 बजकर 48 मिनट से अगले दिन शाम 7 बजकर 20 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी। रोहिणी नक्षत्र रात्रि 8:49 बजे से सोमवार रात्रि 8:05 बजे तक रहेगा। 3 सितंबर को अष्टमी व रोहिणी नक्षत्र का संयोग शाम 7:20 बजे तक रहेगा। इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से सभी दुख दूर होता है और हर इच्छा पूरी होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार,भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करने के कुछ तरीके और नियम बताए गए हैं।
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जन्माष्टमी के दिन क्या करें और क्या ना करें
जन्माष्टमी के दिन किसी के साथ भी गलत व्यवहार नहीं करना चाहिए। गरीब या असहाय व्यक्ति को परेशान करने वाले दुख भोगते हैं। इसलिए जितना हो सके लोगों की मदद करें और उन्हें भोजन कराएं।
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अगर आपके घर में कोई पेड़ पौधा लगा है तो उसे बिल्कुल भी न काटें। बल्कि इस दिन घर के सभी सदस्य मिलकर एक-एक पौधा लगाएं। इससे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
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इस दिन कान्हा की पुरानी मूर्ति की पूजा भी करनी चाहिए। दिन घर में शांति और सदभाव बनाए रखने के लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इसलिए विवाद कलह से दूर रहें। मन को शांत रखें और ईश्वर का ध्यान करें।
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इस दिन भगवान के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर होना चाहिए। बिना तुलसी के भगवान प्रसाद स्वीकार नहीं करतें। महिलाओं का करें सम्मान करें। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। जिस घर में माता लक्ष्मी प्रसन्न हो जाएं वहां कभी किसी चीज की कमी नहीं होती।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर कान्हा के बाल स्वरूप की मूर्ति पर शंख में दूध डालकर अभिषेक करें। इसके बाद मां कान्हा के साथ ही मां लक्ष्मी का भी पूजन करें। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार जरूर आएगा।
अगर आपने घर में तुलसी लगाई है तो आप तुलसी के वृक्ष पर लाल चुनरी ओढ़ा दें। साथ ही वहां घी का दीपक जाएंगे। इसके बाद आप “ॐ वासुदेवाय नम:” का जाप भी करें। ऐसा करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।