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- फोटो : जी पॉल
उपासना से प्राप्त होती है आत्मोत्कृष्टि
आत्मा की श्रेष्ठता परमात्मा की उपासना से प्राप्त होती है। नास्तिक अथवा आध्यात्मिक व्यक्ति संसार का कोई भी वैभव, पदार्थ, भोग क्यों न प्राप्त कर लें, पर उसे सच्ची आत्मोत्कृष्टि नहीं मिल सकती है। इस संसार में जो कुछ शुभ, श्रेष्ठ, मंगलमय है वह सब उस परमपिता की विभूति है। उसी से सम्पन्न होती है और उसी में आश्रित है। संसार की सारी श्रेष्ठताओं को परमात्मा का आभास ही माना गया है। आत्मा की श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए संसार के साधना की ओर न जाकर परमात्मा की उपासना करनी चाहिए।