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नवरात्रि 2018: शक्ति की उपासना के दौरान जरूर रखें इन बातों का ध्यान

Wed, 10 Oct 2018 10:59 AM IST
डॉ. प्रणव पण्ड्या
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navratri 2018
नवरात्रि उपासना का महापर्व है। नवरात्रि में की गयी उपासना अनेक लाभ देती है। उपासना अर्थ है-समीप बैठना। सामीप्य अथवा उपसंग। जिसके समीप उपस्थित रहा जाएगा, उसकी विशेषता अपने में आ जाना स्वाभाविक ही होता है। जिस तरह बर्फ की पहाड़ियों के बीच बैठने से ऊष्णता प्राप्त होती है और आग के पास जाने से गर्मी। फूलों की निकटता हमें सुगंधित होने का अहसास कराती है, तो वहीं गंदे नालों के पास दुर्गंध के कारण जाने से हिचकिचाहट होना स्वभाविक है। संपर्क अथवा उपस्थिति को गुण-दोषों की ग्राह्यता का बहुत बड़ा कारण माना गया है। नवरात्रि साधना भगवान के निकट बैठकर उनके सामीप्य का लाभ लेने का सुनहरा अवसर है।
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maa durga worship - फोटो : maa durga worship
उपासना में दिखावा नहीं
असंख्य लोग पूजा पाठ करते दिखलाई पड़ते हैं। वे ऐसा भी समझते हैं कि उपासना कर रहे हैं। बहुत से दूसरे लोग भी उन्हें उपासक मान बैठते हैं, पर उनकी यह उपासना वांछित फल के साथ सफल नहीं होती। न तो उन्हें श्रेष्ठता मिलती है और न आत्म शांति। वे पूजा पाठ करने के बाद भी झूठ बोलते हैं और कई तरह के कुकर्म करते हैं। जिसके फलस्वरूप मन में न तो शीतलता और न ही संतोष की अनुभूति होती है।
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navratri 2018 - फोटो : navratri 2018

निकटता से होता है लाभ

उपासना में रहने वाला व्यक्ति परमात्मा के समीप ही रहता है और उसके परिणामस्वरूप उसकी विशेषताएं ग्रहण करता रहता है। परमात्मा सारी श्रेष्ठताओं और उत्कृष्टताओं का विधान है। इसलिए वे गुण उस उपासक में भी आने और बसने लगता है। जो भी उपासना द्वारा परमात्मा का सामीप्य प्राप्त करेगा, उसके समीप बना रहेगा, उसमें परमात्मा का गुण श्रेष्ठता का स्थानांतरण होना स्वाभाविक और निश्चित ही है।

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navratri - फोटो : जी पॉल

उपासना से प्राप्त होती है आत्मोत्कृष्टि

आत्मा की श्रेष्ठता परमात्मा की उपासना से प्राप्त होती है। नास्तिक अथवा आध्यात्मिक व्यक्ति संसार का कोई भी वैभव, पदार्थ, भोग क्यों न प्राप्त कर लें, पर उसे सच्ची आत्मोत्कृष्टि नहीं मिल सकती है। इस संसार में जो कुछ शुभ, श्रेष्ठ, मंगलमय है वह सब उस परमपिता की विभूति है। उसी से सम्पन्न होती है और उसी में आश्रित है। संसार की सारी श्रेष्ठताओं को परमात्मा का आभास ही माना गया है। आत्मा की श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए संसार के साधना की ओर न जाकर परमात्मा की उपासना करनी चाहिए।

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navratri - फोटो : navratri

परमात्मा से जोड़ती है उपासना

सच्ची उपासना आत्मा को परमात्मा से जोड़ देता है। ऐसा करने पर, जिस प्रकार किसी प्रणाली द्वारा भरे जलाशय से खाली जलाशय का सम्पर्क हो जाने से वह उसके समान हो जाता है। उसी प्रकार आत्मा द्वारा परमात्मा से संबंध बना लेने से परमात्मा की श्रेष्ठताएं मनुष्य में भी प्रवाहित हो जाती हैं, किन्तु इस माध्यम के बीच कोई व्यवधान रख दिया जाए, तो प्रवाह रुक जाएगा। जलाशय को जल और मनुष्य को श्रेष्ठता प्राप्त नहीं होगी।

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maa durga

आश्विन नवरात्र में उपासना से मिलता है अनेक लाभ

जिस अनुपात में साधना के मर्म अंतस की गहराई में उतरती है, उसी अनुपात में वैयक्तिक प्रखरता और सामूहिक समर्थता की अभिवृद्धि होती है। सर्वतोमुखी प्रगति का पथ प्रशस्त होता है। चेतना में उत्कृष्टता का स्तर बढ़ने लगता है। साधना से ही अध्यात्म तत्वज्ञान और साधना विधान की व्यावहारिक गरिमा प्रकट होती है। यह प्रतिफल ऐसे हैं जिन्हें अपनाए जाने पर मनुष्य में देवत्व का उदय होना सुनिश्चित है। जहां सज्जनता बढ़ेगी वहां अपनी इसी धरती पर स्वर्ग जैसा वातावरण चहुंओर दिखाई देगा।

लेखक- अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख व देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं।

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