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जानें कैसे मनाई जाती है बकरा ईद और कब हुई थी इसकी शुरुआत

Mon, 12 Aug 2019 08:17 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : अमर उजाला
12 अगस्त को देशभर में बकरा ईद मनाया जाएगा। बकरा ईद कुर्बानी का त्योहार है। बकरा ईद को ईद-उल-अजहा या ईद-उल-जुहा के नाम से जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह त्योहार हर साल जिलहिज्ज के महीने में लोग मनाते हैं। बता दें कि इस्लामिक कैलेंडर, अंग्रेजी कैलेंडर से थोड़ा छोटा होता है। इसमें अंग्रेजी कैलेंडर से 11 दिन कम माने जाते हैं। 
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- फोटो : PTI
बकरा ईद का त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम द्वारा दी गई कुर्बानी के बाद शुरू हुआ। सपने में मिले अल्लाह के आदेश पर इब्राहिम को अपनी प्रिय चीज कुर्बान करनी थी। इस पर इब्राहिम ने अपने सभी प्रिय जानवर कुर्बान  कर दिए। लेकिन इसके बाद उन्हें दोबारा कुर्बानी का सपना आया तो उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी दी और बाद में आंखें खोली तो पाया कि उनका बेटा खेल रहा है। उसकी जगह पर एक बकरे की कुर्बानी खुद हो गई थी। तभी से बकरे की कुर्बानी की प्रथा चली आ रही है। 

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- फोटो : अमर उजाला
ऐसे होती है त्योहार की शुरुआत
जिन लोगों के घर में बकरा पालन हो रहा होता है, वे अपने प्रिय बकरे की कुर्बानी देते हैं। लेकिन जिन लोगों के घर में ऐसा नहीं होता और वे कुर्बानी देना चाहते हैं तो उन्हें कुछ दिन पहले बकरा खरीदकर लाना होता है ताकि उस बकरे से उन्हें लगाव हो जाए। 

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- फोटो : ani
बकरा ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल सुबह की नमाज अदा करते हैं। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के बाद बकरे का मीट तीन हिस्सों में बांटा जाता है। 
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- फोटो : अमर उजाला
गोश्त के इन तीन भागों में एक भाग गरीबों के लिए, दूसरा भाग रिश्तेदारों में बांटने के लिए और तीसरा भाग अपने पास रखा जाता है।
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