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Kharmas 2026: आज से शुरू खरमास, अब एक महीने तक भूलकर भी न करें ये कार्य

Sun, 15 Mar 2026 07:59 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Kharmas 2026: जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों में होते हैं, तब उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। माना जाता है कि  इस समय सूर्य की ऊर्जा का प्रभाव संतुलित नहीं रहता, इसलिए नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
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Kharmas - फोटो : अमरउजाला
Kharmas In March 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष खरमास की शुरुआत 15 मार्च 2026 से हो रही है, जो 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञ, नए व्यापार की शुरुआत या वाहन और घर की खरीदारी जैसे शुभ कार्य करने से परहेज किया जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों (धनु या मीन) में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। इसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह समय आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।

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कब से शुरू होगा खरमास? - फोटो : Adobe Stock
कब से शुरू होगा खरमास?
पंचांग के अनुसार 14 मार्च 2026 की अर्द्धरात्रि में सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास की शुरुआत मानी जाएगी। उदया तिथि के अनुसार इसका प्रभाव 15 मार्च से माना जाएगा। सूर्य देव लगभग एक महीने तक मीन राशि में रहेंगे और इस दौरान ही खरमास की अवधि मानी जाती है।

कब होगा खरमास का समापन?
सूर्य देव जब 13 अप्रैल 2026 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब खरमास समाप्त हो जाएगा। इसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन से फिर से मांगलिक और शुभ कार्य शुरू किए जा सकते हैं।
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साल में दो बार लगता है खरमास - फोटो : Adobe Stock
साल में दो बार लगता है खरमास
  • ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार वर्ष में दो बार खरमास लगता है। 
  • पहला खरमास: जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जो सामान्यतः मार्च से अप्रैल के बीच होता है। 
  • दूसरा खरमास: जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जो आमतौर पर दिसंबर से जनवरी के बीच आता है। 
  • इन दोनों अवधियों में शुभ और मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है।

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क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य? - फोटो : Adobe Stock
क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों में होते हैं, तब उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इस समय सूर्य की ऊर्जा का प्रभाव संतुलित नहीं रहता, इसलिए नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
 
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किन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
किन बातों का रखें ध्यान
  • खरमास के दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नामकरण, कर्णवेध जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।
  • इस दौरान नए व्यवसाय की शुरुआत और संपत्ति की खरीदारी जैसे कार्यों को भी टालना उचित माना जाता है
  • ऐसा माना जाता है कि इस समय किए गए कार्यों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
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किन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Amar Ujala
  • इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप, दान-पुण्य और सूर्य देव की उपासना करना विशेष फलदायी माना जाता है। 
  • जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है, उन्हें इस समय सूर्य मंत्र का जप और सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। 
  • इससे सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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