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Karwa Chauth 2020: करवा चौथ की पूजा इन पांच चीजों के बिना रह जाती है अधूरी

Tue, 03 Nov 2020 12:32 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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करवा चौथ 2020:करवा चौथ व्रत वाले दिन शाम को चंद्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले ही पूजा आरंभ कर देनी होती है।
कल यानी 04 नवंबर, बुधवार को करवा चौथ है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस बार मलमास का महीना पड़ने के कारण करवा चौथ देरी से आ रहा है। करवा चौथ व्रत सुहाहिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। करवा चौथ के दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और रात को चांद के निकलने का इंतजार करती हैं। चांद के निकलने पर पूजा और जल देकर अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करती हैं। करवा चौथ में आसपास की सभी सुहागिन महिलाएं एक जगह पर एकत्रित होकर करवा माता की पूजा के साथ कथा सुनती हैं। करवा चौथ पूजा में कुछ चीजों का विशेष महत्व होता है।

Karwa Chauth 2020: करवा चौथ व्रत कल, जानिए पूजा विधि, महत्व और दिल्ली से देहरादून तक चांद निकलने का समय
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करवा चौथ 2020 - फोटो : Amar Ujala
करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखना
करवा चौथ में पूरे दिन उपवास रखकर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि की मनोकामना मांगती हैं। इसके लिए वे करवा चौथ का व्रत निर्जला रखती हैं। पूरे दिन इस व्रत को बिना कुछ खाएं-पीएं रखती हैं।

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करवा चौथ - फोटो : amar ujala
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा
पौराणिक मान्यता के अनुसार पति और सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए इस दिन शिव परिवार के साथ-साथ चंद्रमा का पूजन भी करने का विधान है। इसलिए करवा चौथ पर मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

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करवा चौथ 2020
सरगी का उपहार :
सरगी करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिला को उनकी सास के द्वारा दी जाती है। सरगी से ही करवा चौथ के व्रत का प्रारंभ माना गया है। इस सरगी में मिठाई, फल और मेवे आदि होते हैं जिसे सूर्योदय के समय बहू व्रत से पहले खाती हैं।
 
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karwa chauth
शिव-गौरी की मिट्टी की मूर्ति : करवा चौथ में पूजा के लिए मिट्टी से शिव, गौरी और गणेश जी की मूर्ति बनाई जाती है। माता गौरी को सिंदूर, बिंदी, चुन्नी तथा भगवान शिव को चंदन, पुष्प, वस्त्र आदि चढ़ाने का विधान है।
 
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करवा चौथ 2020 - फोटो : Amar Ujala
कथा: करवाचौथ की शाम को सभी सुहागिन व्रती महिलाएं एक जगह एकत्र होती हैं। जहां पर वे करवा चौथ की कथा सुनाती हैं। फिर चांद के निकलने पर अर्घ्य देती हैं और चंद्रदेव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।। इसके बाद पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं।
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