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Karwa Chauth 2020: चांद और छलनी के बिना करवा चौथ का व्रत है अधूरा, जानिए महत्व

Wed, 04 Nov 2020 12:36 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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करवाचौथ पर्व मनाया - फोटो : अमर उजाला
प्रतिवर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। यह व्रत अधिकतर सुहागिन महिलाएं रखती हैं लेकिन कई जगहों पर कुंवारी कन्याओं द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इसे रखा जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। इस व्रत में जीवनसाथी के साथ ही चांद और छलनी की भी महत्ता है।

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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चन्द्रमा को ब्रह्मा का रूप माना जाता है। इसके अलावा चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त है। चांद में सुंदरता, सहनशीलता, प्रसिद्धि और प्रेम जैसे सभी गुण पाए जाते हैं। इसलिए सुहागिन महिलाएं छलनी से पहले चांद देखती हैं फिर अपने पति का चेहरा। वह चांद को देखकर यह कामना करती हैं कि उनके पति में भी यह सभी गुण आ जाएं। 
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करवाचौथ
करवा चौथ के व्रत के पीछे एक बेहद रुचिकर कथा है। कथा के अनुसार, 7 भाईयों की बहन चांद न दिखने के कारण व्रत नहीं खोलती है,तो भाई उसे दूर से आग जलाकर झूठा चांद दिखाते हैं। इस व्रत में महिलाएं थाली में पूजा की साम्रगी , छोटे मटके में पानी और छलनी रखती हैं। चांद निकल जाने पर महिलाएं छलनी में दिया रखकर पहले चांद फिर अपने पति को देखती हैं। 
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- फोटो : amar ujala
व्रत खोलते समय छलनी के उपयोग के पीछे कई कारण बताये जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि छल से बचने के लिए छलनी का इस्तेमाल होता है। छलनी के जरिये चांद को बहुत बारीकी से देखा जाता है। उसके बाद छलनी में दीपक रखकर पति का चेहरा देखा जाता है। दीपक की पवित्र रोशनी का प्रतिबिंब जब जीवनसाथी के चेहरे पर पड़ता है तो पत्नी दोनों के रिश्ते में सदैव उजियारे के बने रहने की भी कामना करती है। 
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