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Kartik Purnima 2025: आज मनाई जा रही है कार्तिक पूर्णिमा, जानें धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

Wed, 05 Nov 2025 07:27 AM IST
ज्योति मेहरा वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

Kartik Purnima Ganga Snan 2025: कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिकी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु विविध देवी देवताओं का पूजन करते और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा 2025 - फोटो : Amar Ujala
Kartik Purnima 2025: भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। वर्ष के बारह मासों में कार्तिक मास आध्यात्मिक एवं शारीरिक ऊर्जा संचय के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कार्तिक पूर्णिमा हमें देवों की उस दीपावली में शामिल होने का अवसर देती है, जिसके प्रकाश से प्राणी के भीतर छिपी तामसिक वृतियों का नाश होता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिकी पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। 

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कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का महत्व - फोटो : adobe stock
कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का महत्व
शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, पापों का नाश होता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु विविध देवी देवताओं का पूजन करते और मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं। जनमानस के अंदर स्थित आसुरी वृतियों के नाश व दैवीय शक्तियों के उत्थान के लिए कार्तिक पूर्णिमा को लक्ष्मी नारायण की महाआरती करके दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। ताकि हम अपने भीतर देवत्व धारण कर सकें अर्थात सद्गुणों को अपने अंदर समाहित कर सकें, नर से नारायण बन सकें।
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कार्तिक पूर्णिमा तिथि 2025 - फोटो : adobe stock
कार्तिक पूर्णिमा तिथि 2025
पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 04 नवंबर 2025 को प्रात:काल 10:36 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 05 नवंबर 2025 को सायंकाल 06:48 बजे तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि को आधार मानते हुए इस साल कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व 05 नवंबर बुधवार को मनाया जाएगा।

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वैष्णव भक्त शैव भक्त और सिख धर्म के लिए भी विशेष है यह दिन - फोटो : adobe stock
वैष्णव भक्त शैव भक्त और सिख धर्म के लिए भी विशेष है यह दिन
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व सिर्फ वैष्णव भक्तों के लिए ही नहीं शैव भक्तों और सिख धर्म के लिए भी बहुत ज्यादा है। विष्णु के भक्तों के लिए यह दिन इसलिए खास है क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था। प्रथम अवतार में भगवान विष्णु मत्स्य यानी मछली के रूप में थे। भगवान को यह अवतार वेदों की रक्षा, प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों, अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इससे सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हुआ।
 
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वैष्णव भक्त शैव भक्त और सिख धर्म के लिए भी विशेष है यह दिन - फोटो : adobe stock
शिव भक्तों के अनुसार इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का संहार कर दिया जिससे वह त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए। इससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिव जी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है। इसलिए इसे 'त्रिपुरी पूर्णिमा' भी कहते हैं। 
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वैष्णव भक्त शैव भक्त और सिख धर्म के लिए भी विशेष है यह दिन - फोटो : adobe stock
इसी तरह सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है। इस तरह यह दिन एक नहीं बल्कि कई वजहों से खास है। इस दिन गंगा-स्नान,दीपदान,अन्य दानों आदि का विशेष महत्त्व है। इस दिन क्षीरसागर दान का अनंत महत्व है,क्षीरसागर का दान 24 अंगुल के बर्तन में दूध भरकर उसमें स्वर्ण या रजत की मछली छोड़कर किया जाता है। यह उत्सव दीपावली की भांति दीप जलाकर सायंकाल में मनाया जाता है।
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करें श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ - फोटो : adobe stock
करें श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ
कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद भगवान श्री सत्यनारायण के व्रत की कथा अवश्य ही सुननी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान श्री हरि की गंध, अक्षत, पीले लाल पुष्प, नारियल, पान, सुपारी, कलावा, तुलसी, आंवला, दूर्वा, शमी पत्र, पीपल के पत्तों एवं गंगाजल से पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं रहता है। वह इस लोक में समस्त सांसारिक सुखों को भोगते हुए अंत में स्वर्ग को प्राप्त होता है। इस दिन सायंकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाए जाते हैं और गंगाजी/नदियों को भी दीपदान किया जाता है।

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दीपदान का महत्व  - फोटो : adobe stock
दीपदान का महत्व 
कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रत्येक मनुष्य को दीपदान अनिवार्य रूप से करना चाहिए। स्कन्द पुराण में ब्रह्मा जी ने नारद जी को कार्तिक मास में दीपदान की महिमा के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार कार्तिक माह में दीपदान से राजसुय यज्ञ और अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। उसमें भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करने का पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय रहता है। पूरे वंश में किसी को भी नरक का मुँह नहीं देखना पड़ता है।
 
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कार्तिक पूर्णिमा - फोटो : Amar Ujala
इस दिन संध्याकाल में जो लोग अपने घरों को दीपक जला कर सजाते है उनका जीवन सदैव आलोकित प्रकाश से प्रकाशित होता है उन्हें अतुल लक्ष्मी, रूप, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, माँ लक्ष्मी ऐसे लोगो के घरों में स्थाई रूप से सदैव निवास करती है। इसीलिए इस दिन सभी को अपने घर के आँगन, मंदिर, तुलसी, नल के पास, छतों और चारदीवारी पर दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए।

वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी


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