10 जुलाई से भगवान भोलेनाथ का सबसे पसंद महीना सावन शुरू हो चुका हैं, और इसी के साथ कांवड़ यात्रा भी। भोले के भक्त सावन प्रारंभ होते ही केसरिया रंग के कपड़ों में अपने कंधे पर गंगाजल से भरे कमंडल को लेकर शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए निकल पड़ते हैं। कांवड़ियों की मन्नते तभी पूरी होती जब इन नियमों का पालन किया जाए।
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कांवड़ यात्रा शुरू करते ही कावंड़ियों को किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए। यात्रा पूरी होने तक मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
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कांवड़ यात्रा शुरु करते समय हर दिन स्नान करने के बाद ही कावड़ को छूना चाहिए। ऐसा नहीं करने से इसका फल नहीं मिलता।
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कांवड़ यात्रा के दौरान चमड़े से बनी वस्तु और चारपाई का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा किसी पेड़ के नीचे भी कांवड़ को नहीं रखना चाहिए।
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कांवड़ ले जाते समय पूरे यात्रा के दौरान बोलबम और जय भोले की आवाज जरुर लगाएं। ऐसा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है।