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Navratri 2019: यहां रखे कलश से मिलता है कई गुना फायदा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

Tue, 24 Sep 2019 08:23 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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navratri 2019
नवरात्रि में कलश स्थापना करते ही खत्म हो जाती है नकारात्मक ऊर्जा अर्थात् कलश के मुख में विष्णुजी, कंठ में रुद्र, मूल में ब्रह्मा और मध्य में सभी मातृशक्तियां निवास करती हैं। कलश स्थापना का अर्थ है नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तितत्त्व का घट अर्थात कलश में आवाहन कर उसे सक्रिय करना। शक्तितत्व के कारण वास्तु में उपस्थित कष्टदायक तरंगे नष्ट हो जाती हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन पूजा की शुरुआत दुर्गा पूजा से निमित्त संकल्प लेकर ईशानकोण में कलश-स्थापना करके की जाती है।
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kalash - फोटो : social media
घटस्थापना में सर्वप्रथम खेत की मिट्टी लाकर उसमें पांच प्रकार के धान बोएं जाते है। पांच प्रकार के धानों में गेहूं, जौ, चना, तिल, मूंग आदि होते हैं। जल, चंदन, पुष्प, दूर्वा, अक्षत, सुपारी तथा सिक्के मिट्टी अथवा तांबे के कलश में रखें जाते है। यदि घटस्थापना के मंत्र मालूम न हों, तो सभी वस्तुओं के नाम लेते हुए 'समर्पयामि' का उच्चारण करें। शास्त्रीय विधि से कलश में डाले जाने वाले सभी पदार्थ न मिलने पर चंदन, रोली, हल्दी की गांठ, सुपारी, एक रुपए का सिक्का, गंगाजल व दूर्वादल भी कलश में डाल सकते हैं।
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kalash - फोटो : social media
नवरात्रि के पर्व का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू हो रही है जो कि 7 अक्टूबर तक चलेगी। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। नवरात्र में व्रत की शुरुआत करने के पहले कलश स्थापना भी की जाती है। जानते हैं नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें...

 

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kalash - फोटो : social media
29 सितंबर से शुरू होगी नवरात्रि, ऐसे करें घट स्थापना
ढककर रखें कलश

कलश स्थापना करने से पहले यह ध्यान रखें कि जिस जगह कलश स्थापित किया जाएगा वो जगह साफ होनी चाहिए। कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया व साफ लाल कपड़ा बिछाएं। ध्यान देने वाली बात यह है कि कलश का मुंह खुला न छोड़ें, उसे ढक कर रखें। वहीं अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें।
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दीया
जलाएं अखंड दीपक
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.16 से लेकर 7.40 मिनट तक है। इसके अलावा 11.48 से 12.35 तक भी कलश स्थापित किया जा सकता है। उत्तर पूर्व दिशा देवताओं की दिशा है। इसलिए, इस दिशा में माता की प्रतिमा और घट स्थापना करें। स्थापना और पूजा करने के बाद माता को फल व मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अखंड दीपक जलाएं जो 9 दिन तक जलता रहे।
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कलश स्थापना
यह फायदे देता है घर में रखा कलश
अपने आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। घर में सुखशांति लाता है। नारियल को शुभ फल देने वाला माना जाता है। घर के मंदिर में रखा गया कलश वहां का माहौल भक्तिमय बनाता है। आपको पूजा में एकाग्रता देता है। घर में बीमारियां हों तो नारियल का कलश उसको दूर करने में मदद करता है। कलश को भगवान गणेश का प्रतिरूप भी माना जाता है, इसलिए हमारे कार्यों में आ रही रुकावटों को दूर करता है।
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कलश स्थापना
बन रहे हैं शुभ संयोग
इस बार नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग में हो रही है। इसे विशेष संयोग माना जाता है। इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी। 9 दिनों की नवरात्रि शक्ति की उपासना के लिए शुभ मानी जाती है। 9 दिन की नवरात्रि में इस बार दो सोमवार पड़ रहे हैं। यह अत्यंत शुभ संयोग है क्योंकि सोमवार को दुर्गा पूजा का कई गुना फल मिलता है। इस बार शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में 6 दिन विशेष योग बनेंगे।
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