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Kajari Teej 2024: कजरी तीज का व्रत आज, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस विधि से करें पूजा

Thu, 22 Aug 2024 05:59 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Kajari Teej 2024 - फोटो : अमर उजाला
Kajari Teej 2024: हिंदू धर्म में तीन तीज मनाई जाती है, जिनमें हरियाली तीज, कजरी और हरतालिका तीज का नाम शामिल है। ये सभी भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ उपवास रखने का विधान है। इन तीनों तीज में से हरियाली तीज को पहले मनाया जाता है। फिर कजरी तीज का व्रत किया जाता है। ये उपवास आज यानी 22 अगस्त 2024 को रखा जा रहा है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और तरक्की के लिए भोलेनाथ और पार्वती माती की पूजा करती हैं। साथ ही परिवार की सुख-समृद्धि के लिए दान से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

इस दौरान कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए ये व्रत रखती हैं। कजरी तीज पर धृति योग और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ऐसे में पूजा पाठ करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसी कड़ी में आइए कजरी तीज पूजा विधि से लेकर शुभ योग के बारे में जान लेते हैं।
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Kajari Teej 2024 - फोटो : istock
कजरी तीज शुभ मुहूर्त 2024
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि आरंभ:  21 अगस्त , सायं 05: 06 मिनट से
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त: 22 अगस्त,दोपहर 01: 46 मिनट पर
पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 04:26 से प्रातः 05:10 तक रहेगा
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Kajari Teej 2024 - फोटो : freepik
कजरी तीज की पूजा सामग्री
कजरी तीज की पूजा के लिए कलश, अक्षत या चावल, दूर्वा घास, घी, कपूर और केला के पत्ते को जरूर रखें। इस दौरान बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, जनेऊ, अबीर-गुलाल, श्रीफल, चंदन, गाय का दूध और गंगाजल को शामिल करना न भूलें। पूजा में आप दही, मिश्री, शहद, पंचामृत भी रखें। इसके अलावा देवी को अर्पित करने के लिए सोलह श्रृंगार से जुड़े सभी सामान को भी रखें।

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Kajari Teej 2024 - फोटो : istock
कजरी तीज की पूजा विधि
कजरी तीज के दिन सुबह ही स्नान करें और साफ वस्त्रों को धारण कर लें। अब शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा स्थान पर चौकी लगाएं। चौकी पर लाल रंग या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके बाद माता पार्वती और शिव जी की तस्वीर को स्थापित कर लें। पूजा की सभी सामग्रियों को अपने पास रखें। फिर महादेव को बेलपत्र, फूल, मिठाई और धतूरा अर्पित करें। वहीं पार्वती जी को सुहाग का सामान चढ़ाएं। फिर धूप और दीप आदि जलाकर आरती करें। इस दौरान शिव जी के मंत्रों का भी जाप करें। अंत में व्रत कथा का पाठ करें।
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Kajari Teej 2024 - फोटो : Istock
रात में ऐसे करें पूजा
कजरी तीज के दिन चंद्रोदय होने पर पूजा करना शुभ होता है। पूजा के लिए आप एक चांदी की अंगूठी और गेहूं के कुछ दाने लें। फिर चंद्रदेव की पूजा करें। इसके बाद उन्हें अर्घ्य दें। अंत में किसी सौभाग्यवती स्त्री को कुछ सुहाग से जुड़ी चीजों का दान करें। इससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती हैं।
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Kajari Teej 2024 - फोटो : freepik
जरूर करें ये खास उपाय
कजरी तीज पर दान करने से धन धान्य में वृद्धि होती है। इस दिन निर्जला व्रत और देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने से दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती है। ज्योतिष के अनुसार, कजरी तीज की शाम में सरसों के तेल का दीपक शनि मंदिर में जलाएं। इससे बेरोजगारी की समस्या दूर होती है।
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Kajari Teej 2024 - फोटो : freepik
शिव जी की आरती 
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।
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Kajari Teej 2024 - फोटो : istock
मां पार्वती की आरती 
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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