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Sawan Shivratri 2026: 11 या 12 अगस्त कब चढ़ेगा जल ? जानें सही डेट और चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त

Thu, 06 Aug 2026 11:23 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि महादेव की पूजा के लिए सबसे शुभ दिन है। इस तिथि पर मुख्य रूप से जलाभिषेक करने का विधान है। मान्यता है कि, शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
 
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र दिनों में एक है। इस दिन सच्चे मन से महादेव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी के साथ सावन शिवरात्रि पर कांवड़ यात्रा से लाया गया पवित्र गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करने का भी विधान है। कहते हैं कि, इस शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी दुखों का अंत होता है। साथ ही मनचाहा साथी पाने की कामना पूरी और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, साल 2026 में सावन शिवरात्रि कब मनाई जाएगी।
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : AI
सावन शिवरात्रि 2026 
  • सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को प्रातः 4 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ होगी। 
  • यह तिथि 12 अगस्त 2026 को रात्रि 1 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। 
  • तिथि के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी और देशभर के शिवालयों में जल चढ़ाया जाएगा।
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : adobe
चार प्रहर की पूजा का समय
  • प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
  • तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर की पूजा सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक

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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : adobe
पूजा विधि
  • सावन शिवरात्रि के दिन घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और गंगाजल से जलाभिषेक करें। 
  • इसके बाद पंचामृत से अभिषेक करें और फिर एक बार जल चढ़ाएं।
  • शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं और चावल के साबुत दाने अर्पित कर लें।
  • भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाकर धूप-दीप भी जला लें।
  • इस दौरान आप नंदी जी के कानों में अपनी मनोकामनाएं कहें और उन्हें भी चंदल का तिलक लगाएं।
  • अब आप माला के साथ 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का स्मरण करें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और फलों को भोग के रूप में महादेव के पास रखें।

 
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Sawan Shivratri 2026 - फोटो : freepik
इन मंत्रों के साथ करें जलाभिषेक
  • ॐ नमः शिवाय।
  • ॐ महेश्वराय नमः।
  • ॐ नमो नीलकण्ठाय।
  • ॐ पार्वतीपतये नमः।
  • ॐ पशुपतये नमः।
  • ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय॥
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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