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Jyeshth Purnima 2020: कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा, जानें तारीख, मुहूर्त और इस तिथि का महत्व

Mon, 01 Jun 2020 07:51 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
Jyeshth Purnima 2020: हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-ध्यान एवं दान-पुण्य के कार्यों को करने से शुभफल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस पावन तिथि पर कबीरदास जयंती एवं वट पूर्णिमा व्रत जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं। आइए जानते हैं इस बार पूर्णिमा तिथि की तारीख और मुहूर्त क्या है और ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है। 
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पूर्णिमा का चंद्रमा - फोटो : Pixabay
कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि?
Jyeshth Purnima 2020 Date: इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 5 जून को पड़ रही है।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त - फोटो : सोशल मीडिया
ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि शुरु - जून 5, 2020 को 03:17:47 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - जून 6, 2020 को 24:44 बजे

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पूर्णिमा स्नान - फोटो : अमर उजाला
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन इस विधि करें व्रत
महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं और वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पूजा आराधना करती हैं। एक बांस की टोकरी मे सात तरह के अनाज रखते जिसे कपड़े के दो टुकड़े से ढ़क देते है दूसरी टोकरी में सावित्री की प्रतिमा रखते है फिर वट वृक्ष को जल, अक्षत, कुमकुम से पूजा करती हैं। इसके पश्चात् लाल मौली से वृक्ष के सात बार चक्कर लगाते हुए ध्यान करती हैं। इस पूजन प्रक्रिया के बाद सभी महिलाएं सावित्री की कथा सुनाती है और अपनी क्षमता के अनुसार दान दक्षिणा देते हुए अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। 
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वट पूर्णिमा व्रत - फोटो : अमर उजाला
इस दिन होता है वट पूर्णिमा व्रत
वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता है। यह व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से रखा जाता है, जबकि उत्तर भारत में यह व्रत वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता हैं, जो ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। 
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कबीर दास जयंती - फोटो : social media
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है कबीरदास जयंती
संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए प्रति वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन उनकी जयंती मनाई जाती है। कबीरदास भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे, वे ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों को दूर करने में लगा दिया। दोहे के रूप में उनकी रचनाएं आज भी गायी गुनगुनाई जाती हैं।
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