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Jitiya Vrat 2024: जितिया व्रत के दौरान जरूर बरतें ये सावधानियां, असफल नहीं होगी पूजा

Wed, 25 Sep 2024 12:49 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Jitiya 2024 Vrat - फोटो : Amar Ujala
Jitiya Vrat 2024: जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया व्रत भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसे बेहद महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस पर्व में माताएं अपनी संतानों के अच्छे स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन माताएं भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं और अपनी संतानों के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। इस साल 25 सितंबर 2024 यानी बुधवार के दिन जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाएगा।

इस व्रत को करने से संतान को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है और भगवान श्रीकृष्ण आपकी संतान की सदैव रक्षा करते हैं। माना जाता है कि इस महान व्रत को करने से संतान से जुड़ी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। लेकिन इस व्रत के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, अन्यथा यह व्रत खंडित भी हो सकता है। 
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jitiya vrat - फोटो : freepik
जितिया व्रत बेहद कठिन व्रतों में एक है, जिसके नियम पूरे 3 दिन तक किए जाते हैं। इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है और पारण के बाद जितिया का व्रत पूरा होता है। इस व्रत में महिलाएं नहाए खाए के दिन स्नान आदि और पूजा-पाठ के बाद भोजन करती हैं। इसके बाद दूसरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। नहाय-खाय के दिन लहसुन-प्याज, मांसाहार या तामसिक भोजन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
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jitiya vrat - फोटो : freepik
माना जाता है कि एक बार जितिया का व्रत रखना शुरू कर दिया जाता है, तो इसे हर साल नियम के अनुसार रखना चाहिए। इस व्रत को बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।

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Pooja Thali - फोटो : freepik
जितिया व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस दिन महिलाओं को मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए। इसके अलावा इस दौरान लड़ाई-झगड़े और कलह से भी दूर रहना चाहिए, वरना व्रत सफल नहीं होता है। 
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Pooja Thali - फोटो : freepik
जितिया व्रत पूजा विधि
प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीपें और छोटा सा तालाब बनाएं।
जितिया में शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करें।
जीमूतवाहन की कुश निर्मित मूर्ति को जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित करें और पीले-लाल रुई से सजाएं।
इसके बाद धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला से उनका पूजन करें।
महिलाएं इस दिन संतान की दीर्घायु और उनकी प्रगति के लिए पूजा करें।
जीवित्पुत्रिका की व्रत कथा जरूर सुनें।
और सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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