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Janmashtami Bhog Rules: जन्माष्टमी पर कितनी बार लगाना चाहिए बाल गोपाल को भोग? जानें सही नियम

Thu, 03 Sep 2026 12:32 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को भोग लगाने की खास परंपरा है। जानें दिन में कितनी बार भोग लगाना शुभ माना जाता है और भोग से जुड़े जरूरी नियम।
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janmashtami 2026 - फोटो : amar ujala
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी बाल गोपाल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भक्त उन्हें तरह-तरह के सात्विक पकवानों का भोग लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को कितनी बार भोग लगाना चाहिए? क्या छप्पन भोग लगाना जरूरी है और माखन-मिश्री का भोग क्यों खास माना जाता है? आइए जानते हैं बाल गोपाल को भोग लगाने से जुड़े प्रमुख नियम और परंपराएं।
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घर में नियमित रूप से बाल गोपाल की सेवा करने वाले भक्त उन्हें समय-समय पर भोजन अर्पित करते हैं। - फोटो : amar ujala

नियमित सेवा में कितनी बार लगाएं भोग?
घर में नियमित रूप से बाल गोपाल की सेवा करने वाले भक्त उन्हें समय-समय पर भोजन अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपराओं में बाल स्वरूप की सेवा में भोजन को अलग-अलग समय पर अर्पित करने की रीति बताई गई है। कई घरों में बाल गोपाल को दिन में चार बार भोग लगाने की परंपरा का पालन किया जाता है।

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आधी रात को जन्मोत्सव और पूजा के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित करना विशेष माना जाता है। - फोटो : instagram

जन्माष्टमी पर भोग का क्या है महत्व?
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि यानी निशीथ काल में माना जाता है। इसलिए आधी रात को जन्मोत्सव और पूजा के बाद भगवान को नैवेद्य अर्पित करना विशेष माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान को भोग लगाते हैं।

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भोग में संख्या से अधिक श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है। - फोटो : Adobe Stock

क्या जरूरी है छप्पन भोग लगाना?
जन्माष्टमी पर छप्पन भोग लगाने की परंपरा काफी प्रसिद्ध है। हालांकि हर घर में 56 तरह के पकवान बनाना आवश्यक नहीं माना जाता। भक्त अपनी क्षमता के अनुसार एक या कुछ सात्विक व्यंजन भी श्रद्धा से भगवान को अर्पित कर सकते हैं। भोग में संख्या से अधिक श्रद्धा और भावना को महत्व दिया जाता है।

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बाल कृष्ण को माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है। - फोटो : amar ujala

माखन-मिश्री का भोग क्यों खास?
बाल कृष्ण को माखन-मिश्री प्रिय मानी जाती है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के अवसर पर बाल गोपाल को माखन और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भक्त इसे प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित करते हैं।

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जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करते हैं। - फोटो : अमर उजाला
भोग लगाने के बाद क्या करना चाहिए?
भगवान को नैवेद्य अर्पित करने के बाद उसे कुछ समय के लिए उनके सामने रखा जाता है। इसके बाद यही भोजन प्रसाद माना जाता है और भक्त इसे श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं। जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करते हैं। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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