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Jagannath Rath Yatra 2025: इस वर्ष कब शुरू हो रही है जगन्नाथ यात्रा? जानें तिथि, महत्व और पौराणिक कथा

Tue, 03 Jun 2025 01:10 PM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Jagannath Rath yatra 2025 Starting Date: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो हर साल ओडिशा के पुरी में धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। इस वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून, शुक्रवार को शुरू होगी। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
Jagannath Rath yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा हिंदू धर्म का एक भव्य पर्व है, जो ओडिशा के पुरी में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। यह यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है, जो जून या जुलाई में पड़ती है। इस वर्ष 2025 में जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून, शुक्रवार को शुरू होगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून को दोपहर 1:24 बजे शुरू होगी और 27 जून को सुबह 11:19 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा। यह यात्रा नौ दिनों तक चलती है और 5 जुलाई को समाप्त होगी। इस दौरान लाखों भक्त रथों को खींचते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं, जो भक्ति और एकता का प्रतीक है।
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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा में शामिल होने या भगवान के दर्शन करने से भक्तों के सभी पापों का नाश होता है और उन्हें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह यात्रा एकता और समानता का भी प्रतीक है, क्योंकि इसमें हर वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के भाग लेते हैं। पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धाम तीर्थों में से एक है, और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है।

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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार सुभद्रा ने अपने भाइयों, जगन्नाथ और बलभद्र के साथ पुरी नगर देखने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए भगवान जगन्नाथ ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया। इस दौरान वे अपनी मौसी के घर, गुंडीचा मंदिर, में सात दिनों तक रुके। तब से यह परंपरा हर साल मनाई जाती है। एक अन्य कथा के अनुसार, यह यात्रा भगवान कृष्ण की मथुरा यात्रा का प्रतीक है, जहां वे अपने भाई-बहन के साथ जाते हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
जगन्नाथ रथ यात्रा की परंपरा और रथों का वैभव
जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत स्नान पूर्णिमा से होती है, जब भगवान को 108 घड़ों से स्नान कराया जाता है। इसके बाद वे 15 दिनों के लिए एकांतवास में रहते हैं। मुख्य यात्रा के दिन तीनों देवताओं को विशाल रथों पर बिठाया जाता है। जगन्नाथ का रथ "नंदीघोष" 16 पहियों वाला, बलभद्र का रथ "तालध्वज" 14 पहियों वाला और सुभद्रा का रथ "दर्पदलन" 12 पहियों वाला होता है। लाखों भक्त इन रथों को खींचते हैं और गुंडीचा मंदिर तक ले जाते हैं। इस दौरान पुरी की सड़कों पर भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिलता है।
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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
पांचवें दिन हेरा पंचमी पर माता लक्ष्मी अपने पति जगन्नाथ से मिलने गुंडीचा मंदिर जाती हैं। नौवें दिन, बहुदा यात्रा के दौरान देवता वापस जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इस यात्रा में चेरा पाहरा अनुष्ठान भी होता है, जिसमें पुरी के राजा रथों की सफाई करते हैं, जो समानता का संदेश देता है। यह पर्व भक्ति, एकता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुपम संगम है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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