Holika Dahan ke Niyam: होली का पर्व हर साल फाल्गुन मास की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लोग रंग-बिरंगे रंगों से खेलते हैं। तो वहीं इससे पहले होलिका दहन पूजा की परंपरा है, जो इस मास की पूर्णिमा तिथि को संपन्न की जाती है। इस बार 7 मार्च को होलिका दहन व 8 मार्च, यानि इसके ठीक अगले दिन होली का मनाई जाएगी। होलिका दहन अनुष्ठान करने और प्रार्थना करने के लिए अलाव के चारों ओर इकट्ठा होकर चिह्नित करते हैं। यह परंपरा हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रहलाद, भगवान विष्णु के भक्त और उसकी राक्षसी चाची होलिका से जुड़ी हुई है। इस तरह होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। प्रतिपदा तिथि पर रंगों और गुलाल से होली खेली जाती है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन भद्रा रहित पूर्णिमा की रात को मनाना उत्तम होता है। इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान भी रखा जाता है। कुछ लोगों को होलिका दहन के दिन होलिका की अग्नि को नहीं देखना चाहिए अन्यथा उन्हें हानि हो सकती है।