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Holika Dahan 2025: कब है होलिका दहन? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Sun, 02 Mar 2025 07:02 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Holika Dahan 2025 Date: होलिका दहन रंग वाली होली से एक दिन पूर्व मनाई जाती है।  आइए जानते हैं होलिका दहन की तिथि, मुहूर्त और महत्व से जुड़ी सभी जानकारी
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होलिका दहन 2025 - फोटो : amar ujala
Holika Dahan Kab Hai: होली का त्योहार हिंदू त्योहार एकता, आनंद और परंपराओं का एक भव्य उत्सव है जिसकी धूम पूरी दुनिया में है। दिवाली के बाद हिंदू कैलेंडर में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में जाना जाने वाला होली आनंद, क्षमा और बुराई पर अच्छाई की जीत की भावना का प्रतीक है। हिंदू पंचांग के अनुसार, होलिका दहन हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है। होली के उत्सव के साथ-साथ होलिका की अग्नि में सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश किया जाता है। इसी क्रम में आइए जानते हैं कि होलिका दहन कब है और इसका महत्व क्या है। 

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होलिका दहन 2025 - फोटो : adobe stock
होलिका दहन तिथि 
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि आरंभ: 13 मार्च , गुरुवार, प्रातः 10:35 से  
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि समाप्त : 14 मार्च, शुक्रवार, दोपहर 12:23 तक 
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होलिका दहन 2025 - फोटो : adobe stock
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 
होलिका दहन का मुहूर्त 13 मार्च,  रात्रि 11 बजकर 26 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में होलिका दहन के लिए कुल 1 घंटे 4 मिनट का समय मिलेगा। 

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होलिका दहन 2025 - फोटो : adobe stock
होलिका दहन के दिन  पूजा विधि 
  • होलिका दहन की पूजा के लिए सबसे पहले गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की मूर्ति बनाकर एक थाली में रखें। 
  • इसके साथ रोली, फूल, मूंग, नारियल, अक्षत, साबुत हल्दी, बताशे, कच्चा सूत, फल और एक कलश भरकर रखें। 
  • फिर भगवान नरसिंह का ध्यान करते हुए उन्हें रोली, चंदन, पांच प्रकार के अनाज और फूल अर्पित करें। 
  • इसके बाद कच्चा सूत लेकर होलिका की सात परिक्रमा करें। 
  • अंत में गुलाल डालकर जल चढ़ाएं।
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होलिका दहन 2025 - फोटो : adobe stock
होलिका दहन महत्व 
होलिका दहन का महत्व पौराणिक कथाओं से कहीं अधिक  है। होलिका के जलाने की परंपरा आत्मा की शुद्धि और मन की पवित्रता का प्रतीक है, जो व्यक्तियों को होली के उत्सव के लिए तैयार करती है। इसके अतिरिक्त, होलिका दहन कृषि चक्र से भी संबंधित है। यह पर्व देवताओं को भरपूर फसल के लिए प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाता है और आने वाले वर्ष में समृद्धि और प्रचुरता के लिए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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