फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maha Shivratri Calendar 2023: तस्वीरों में करें भोले भंडारी के दर्शन, अपनों को दें महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं

Sat, 18 Feb 2023 12:56 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 15
Mahashivratri 2023 : भोलेनाथ थोड़ी सी भक्ति और बेलपत्र एवं जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला
Maha Shivratri Calendar 2023: भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि आज है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा आराधना और की जाती है। इस दिन पूरे दिन उपवास रखते हुए शिवजी की दिन-रात साधना और पूजा-पाठ करने का महत्व होता है। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का जलाभिषेक और  बेलपत्र, भांग, धतूरा, भस्म, चंदन, फूल और दूध-दही अर्पित करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की 14वीं तिथि यानी चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन शनि प्रदोष और महाशिवरात्रि दोनों ही एक साथ पड़ रही है जिस कारण से महाशिवरात्रि का महत्व काफी बढ़ गया है। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर कई शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के त्योहार का महत्व और संपूर्ण पूजा विधि और सभी तरह की जानकारी।
विज्ञापन

2 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

महाशिवरात्रि को लेकर कई तरह की धार्मिक कथाएं प्रचलित है। शिवपुराण के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवलिंग के रूप में भगवान प्रकट हुए थे और भगवान विष्णु और ब्रह्राजी ने सबसे पहले शिवलिंग की पूजा की थी इस कारण से महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार महाशिवरात्रि की तिथि पर ही देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव के संग हुआ था।
विज्ञापन

3 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि बहुत ही प्रिय होती है। इस कारण से हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मासिक शिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है इस दिन शिवलिंग प्रगट हुआ और भगवान शिव संग माता पार्वती का विवाह हुआ था। 

4 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

महाशिवरात्रि पर कब पूजा करना शुभ

महाशिवरात्रि जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि भगवान शिव की रात्रि का पर्व। महाशिवरात्रि पर पूरे दिन-रात पूजा की जा सकती है। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा रात्रि के चार प्रहर में करना सबसे शुभ माना जाता है। जिसमें रात्रि का आठवां मूहूर्त निशीथकाल में पूजा सर्वश्रेष्ठ होता है।
विज्ञापन

5 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

चार पहर के महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

रात्रि प्रथम प्रहर :  18 फरवरी शाम 6:21 मिनट से रात 9:31 तक
रात्रि द्वितीय प्रहर : 18 फरवरी रात 9: 31 मिनट से 12:41 मिनट तक
रात्रि तृतीय प्रहर : 18-19 फरवरी की रात 12:42 मिनट से 3: 51 मिनट तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर :  मध्यरात्रि बाद 3:52 मिनट से सुबह 7:01 मिनट तक
विज्ञापन

6 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

शिवलिंग पर भांग धतूरा क्यों चढ़ाया जाता है ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी की पूजा में भांग. धतूरा और आंकड़े के फूल जैसे विषैली चीजों चढ़ाई जाती है। ऐसी मान्यता है भगवान शिव को नशीले चींजे चढ़ाने से भोले नाथ प्रस्नन होते हैं। शास्त्रों में भगवान शिव विषधारी कहा गया है यानि भगवान शिव सृष्टि और मानव जगत की रक्षा के लिए स्वयं बुरी चीजों को अपने अंदर समाहित करके लोगों की रक्षा करते हैं तभी वे नीलकंठ कहलाए गए हैं। शिवलिंग पर विषैली चीजें चढ़ाने के के पीछे संदेश है कि शिवजी अपने भक्तों को बुरे विचारों से दूर रहने का संदेश देते हैं। इसलिए भगवान शिव को भांग और धतूरा चीजों को बुराईयों के प्रतीक के रूप में चढ़ाई जाती है।
विज्ञापन

7 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
शिवलिंग पर चंदन का लेप क्यों ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने गले में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव से भगवान शिव का शरीर काफी गर्म हो गया था तब सभी देवी देवताओं ने भगवान शिव के शरीर के ताप को कम करने के लिए दूध,दही और जल की धारा डाली थी। दूध-दही और जल चढ़ाने के बाद शिवलिंग पर चंदन से लेप लगाया जाता है ताकि शिवलिंग की तासीर ठंडी हो जाए और भगवान शिव को शीतलता मिले।

8 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
सनातन धर्म के अनुसार जल को देवता माना गया है और पानी के पात्र को कभी भी पैर नहीं लगाया जाता। ठोकर लगा पानी न तो पिया जाता है न ही पिलाया जाता है,यह पाप तुल्य माना जाता है।ऐसेही जो जल देव प्रतिमा पर चढ़ाया गया हो,उसे लांघा नहीं जाता।शिवलिंग पर नित्य अभिषेक होता है। जिस जल से देवता का अभिषेक हुआ है उसे पांव नहीं लगे इसलिए प्रणाल के बाद भी चण्डमुख की व्यवस्था मंदिरों में की जाती है।इसलिए भगवान शिव की पूजा के बाद शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बायीं ओर से शुरू कर जलाधारी के आगे निकले हुए भाग तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौट दूसरे सिरे तक आकर पूरी करनी चाहिए।इसे शिवलिंग की आधी परिक्रमा कहा जाता है।

9 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

बेल पत्र क्यों चढ़ाया जाता है ?

भगवान शिव के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामना को पूरी करते हैं। मान्यता है कि शिव की उपासना बिना बेलपत्र के बिना पूर्ण नहीं होती। बेल वृक्ष की उत्पत्ति के संबंध में 'स्कंदपुराण' में एक कथा है कि एक बार देवी पार्वती ने अपने ललाट से पसीना पौंछकर फेंका, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष की उत्पत्ति हुई। 

10 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाते तुलसी ?

भगवान विष्णु को तुलसी बहुत ही प्रिय होती है लेकिन शिव जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल वर्जित होता है। इसके पीछे एक कथा है जिसमें भगवान शिव ने तुलती के पति शंखचूड़ राक्षस का वध कर दिया था ?

11 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव की पूजा में नहीं होती इन पूजा सामग्रियों का प्रयोग
तुलसी के अलावा भगवान शिव की पूजा में केतुकी और कमल के फूल नहीं अर्पित करते हैं। इसके अलावा भगवान शिव को नारियल का पानी नहीं चढ़ाते हैं। वहीं कभी भी शिवलिंग पर हल्दी और कुमकम नहीं चढ़ाया जाता है। 

12 of 15
mahashivratri 2023 - फोटो : अमर उजाला

भगवान शिव के अभिषेक के फायदे

गन्ने के रस से अभिषेक- शीघ्र विवाह एवं धन प्राप्ति 
शहद से अभिषेक-  कर्ज मुक्ति एवं पूर्ण पति का सुख 
दही से अभिषेक- पशुधन की वृद्धि
कुश एवं जल से अभिषेक- आरोग्य शरीर की प्राप्ति 
मिश्री एवं दूध से अभिषेक- उत्तम विद्या की प्राप्ति 
कच्चे दूध से अभिषेक- पुत्र सुख की प्राप्ति

13 of 15
- फोटो : अमर उजाला

महाशिवरात्रि पर 700 साल बाद बना खास योग

इस बार महाशिवरात्रि के दिन बहुत ही शुभ संयोग बनने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि पर केदार,शंख, शश, वरिष्ठ और सर्वार्थ सिद्धियोग मिलकर पंच महायोग बन रहा है। इस तरह का संयोग करीब 700 साल बाद बना है।  

14 of 15
महाशिवरात्रि पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप - फोटो : अमर उजाला

महाशिवरात्रि पर व्रत के दौरान क्या खाए ?

महाशिवरात्रि पर दिनभर व्रत रखते हुए भगवान शिव की पूजा-उपासना करने का विशेष महत्व होता है। महाशिवरात्रि पर व्रत के दौरान सफेद नमक न खाएं बल्कि इसकी जगह सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा फल और साबूदाने की खिचड़ी खाएं।
विज्ञापन

15 of 15
महाशिवरात्रि 2022 - फोटो : अमर उजाला
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें