हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से भक्तों को मनचाहे फल मिलने की मान्यता है। सप्ताह के जिस वार को प्रदोष व्रत पड़ता है, उसी के आधार पर उसका नाम रखा जाता है। इस बार भाद्रपद माह का अंतिम प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत की सही तारीख, पूजा का समय और इस दिन बनने वाले शुभ योगों के बारे में।