Ganga Dussehra 2026
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गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व और त्रिविध पापों से मुक्ति
शास्त्रों में वर्णित है कि गंगा दशहरा के दिन जो साधक या श्रद्धालु मां गंगा की शरण में जाता है, उनके दिव्य जल में डुबकी लगाता है और धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से मां का षोडशोपचार पूजन (सोलह सामग्रियों से पूजा) करता है, उसके जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं। इस दिन व्रत और स्नान करने से मनुष्य के त्रिविध पाप नष्ट हो जाते हैं। ये 3 प्रकार के पाप निम्नलिखित हैं-
- कायिक पाप: शरीर द्वारा अनजाने में किए गए अपराध या हिंसा।
- वाचिक पाप: वाणी द्वारा किसी का दिल दुखाना, असत्य बोलना या कटु वचन कहना।
- मानसिक पाप: मन में किसी के प्रति बैर, ईर्ष्या या बुरे विचार लाना।
स्कंद पुराण के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति इन तीनों प्रकार के कुल दस पापों (3 कायिक, 4 वाचिक और 3 मानसिक) से मुक्त होकर साक्षात नारायण पद का अधिकारी बनता है।