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Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा पर कर लें ये 10 तरह के स्नान, दूर हो जाएंगे जन्मों के कष्ट

Sat, 23 May 2026 01:06 AM IST
Megha Kumari शैली प्रकाश

सार

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ से जुड़े काम करने पर दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती हैं।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : अमर उजाला
Ganga Dussehra 2026: सनातन धर्म में गंगा दशहरा का दिन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और पाप-मुक्ति का महाप्रायश्चित पर्व है। सनातन संस्कृति में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि साक्षात चेतना और देवत्व का रूप माना गया है। इनमें भी पतित पावनी, मोक्षदायिनी मां गंगा का स्थान सर्वोपरि है। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को "गंगा दशहरा" का महापर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

"नमामि गंगे तव पाद पंकजम, सुर असुर वन्दित दिव्य रूपम।" धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, यही वह पावन तिथि है जब राजा भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल से निकलकर, भगवान शिव की जटाओं से होते हुए धरती पर अवतरित हुई थीं। इस वर्ष यह महापर्व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, इसकी पौराणिक कथा और सबसे विशेष 'दशविधि स्नान' की पूरी विधि।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व और त्रिविध पापों से मुक्ति
शास्त्रों में वर्णित है कि गंगा दशहरा के दिन जो साधक या श्रद्धालु मां गंगा की शरण में जाता है, उनके दिव्य जल में डुबकी लगाता है और धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि से मां का षोडशोपचार पूजन (सोलह सामग्रियों से पूजा) करता है, उसके जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं। इस दिन व्रत और स्नान करने से मनुष्य के त्रिविध पाप नष्ट हो जाते हैं। ये 3 प्रकार के पाप निम्नलिखित हैं-
  • कायिक पाप: शरीर द्वारा अनजाने में किए गए अपराध या हिंसा।
  • वाचिक पाप: वाणी द्वारा किसी का दिल दुखाना, असत्य बोलना या कटु वचन कहना।
  • मानसिक पाप: मन में किसी के प्रति बैर, ईर्ष्या या बुरे विचार लाना।
स्कंद पुराण के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति इन तीनों प्रकार के कुल दस पापों (3 कायिक, 4 वाचिक और 3 मानसिक) से मुक्त होकर साक्षात नारायण पद का अधिकारी बनता है।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
महाफलदायी है 'दशविधि स्नान'
गंगा दशहरा के दिन 'दशविधि-स्नान' का सबसे अधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन जो भी श्रद्धालु पूर्ण निष्ठा के साथ दस विशेष चरणों या द्रव्यों से स्नान करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान परम फल की प्राप्ति होती है।

'दशविधि-स्नान' का अर्थ है शास्त्रों द्वारा निर्देशित दस पवित्र और औषधीय वस्तुओं के माध्यम से शरीर और आत्मा का शुद्धिकरण करना। यदि आप गंगा तट पर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही सामान्य जल में गंगाजल मिलाकर इन दस द्रव्यों का उपयोग कर सकते हैं। आइए जानते हैं वे दस प्रकार कौन-से हैं जो दशविधि स्नान के अंतर्गत आते हैं:
 

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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
1. गोमूत्र से स्नान
पंचगव्य में से एक गोमूत्र को परम पवित्र और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने वाला माना गया है। इसके आंशिक उपयोग से शरीर की आंतरिक और बाह्य अशुद्धियां दूर होती हैं।

2. गोमय (गाय के गोबर) से स्नान
गोमय को साक्षात लक्ष्मी का वास माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी गाय के गोबर में अद्भुत एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसके लेपन से त्वचा शुद्ध और कांतिमय होती है।

3. गौदुग्ध (गाय के दूध) से स्नान
गाय का कच्चा दूध सात्विकता का प्रतीक है। इससे स्नान या तिलक करने से मन शांत होता है और कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है।
 
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
4. गौदधि (गाय के दही) से स्नान
दही से शरीर का मार्जन (लेपन) करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह जीवन में सुख और समृद्धि का संचार करता है।

5. गौघृत (गाय के घी) से स्नान
गाय का शुद्ध घी आयु और बल को बढ़ाने वाला है। इसके स्पर्श और आंशिक लेपन से शरीर को तेज और ओज मिलता है।

6. कुशोदक से स्नान
कुश (एक पवित्र घास) को जल में डालकर बनाए गए जल को 'कुशोदक' कहते हैं। कुश में ब्रह्मांडीय ऊर्जा को सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। इस जल से स्नान करने से मानसिक तनाव दूर होता है।
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शहद का लेपन जीवन में मधुरता और आकर्षण लेकर आता है। इसे पंचामृत में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। - फोटो : इंस्टाग्राम
7. भस्म से स्नान
यज्ञ या हवन की पवित्र अग्नि से निकली भस्म (विभूति) का लेपन साक्षात शिवत्व की प्राप्ति कराता है। यह मनुष्य को वैराग्य, ज्ञान और अहंकार से मुक्ति की याद दिलाता है।

8. मृत्तिका (पवित्र मिट्टी) से स्नान
तुलसी के पौधे की मिट्टी, नदी की मिट्टी या चंदन की मिट्टी का लेपन कर स्नान करने से शरीर सीधे प्रकृति (पृथ्वी तत्व) से जुड़ता है। यह त्वचा के विकारों को दूर करता है।

9. मधु (शहद) से स्नान
शहद का लेपन जीवन में मधुरता और आकर्षण लेकर आता है। इसे पंचामृत में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

10. पवित्र जल (गंगाजल) से स्नान
अंत में, मां गंगा के शुद्ध, निर्मल और दिव्य जल से पूरे शरीर को सराबोर करना। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की अंतिम और सर्वोच्च स्थिति है।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
कैसे करें दशविधि स्नान? (सरल प्रायोगिक विधि)
कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इन दस चीजों से स्नान कैसे किया जाए? इसकी बेहद सरल विधि शास्त्रों में बताई गई है-
  • सामर्थ्य अनुसार लेपन: इन दसों सामग्रियों को बाल्टी भरकर पानी में मिलाने की आवश्यकता नहीं है। साधक को स्नान की शुरुआत में इन वस्तुओं को क्रमशः अपने मस्तक, कंठ, हृदय या पूरे शरीर पर बहुत थोड़ी मात्रा में लेपन या तिलक के रूप में लगाना चाहिए।
  • मंत्र जाप: प्रत्येक द्रव्य को लगाते समय मन में मां गंगा या भगवान शिव का ध्यान करें।
  • पूर्णता: सभी नौ द्रव्यों के क्रमिक लेपन के बाद, अंत में पवित्र गंगाजल युक्त शुद्ध जल से पूरी तरह स्नान कर लें। इस प्रकार आपका 'दशविधि-स्नान' पूर्ण हो जाता है।
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Ganga Dussehra 2026 - फोटो : adobe
गंगा दशहरा पर क्या करें और क्या न करें?
  • दान का महत्व: इस दिन 'दस' की संख्या का बड़ा महत्व है। यदि संभव हो तो 10 ब्राह्मणों को या 10 जरूरतमंदों को अन्न, जल, मटका, सत्तू, पंखा या वस्त्र दान करें।
  • दीपदान: शाम के समय किसी भी नदी, तालाब या घर के मंदिर में मां गंगा के निमित्त 10 दीपक अवश्य जलाएं।
  • पर्यावरण का संकल्प: मां गंगा को स्वच्छ रखना हमारा परम कर्तव्य है। इस दिन संकल्प लें कि हम जल स्रोतों को दूषित नहीं करेंगे और प्रकृति का सम्मान करेंगे।
गंगा दशहरा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अपनी भूलों को सुधारने और नए सात्विक जीवन की शुरुआत करने का एक दिव्य अवसर है। इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को श्रद्धापूर्वक दशविधि स्नान करें, अपने सारे संतापों को मां गंगा के चरणों में अर्पित कर दें और सुखी, समृद्ध एवं रोगमुक्त जीवन का आशीर्वाद पाएं।
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