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गणेश चतुर्थी 2026: कब मनाया जाएगा गणपति बप्पा का जन्मदिन? जानें शुभ मुहूर्त, भद्रा काल और चंद्रोदय का समय

Mon, 07 Sep 2026 02:22 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।  आइए जानते हैं वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी किस तारीख को मनाई जाएगी और पूजा के लिए शुभ समय क्या रहेगा।
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2026 में गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी? - फोटो : AI
Ganesh Chaturthi Kab Hai 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसी कारण हर वर्ष इस तिथि पर गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इसे गणेश जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होता है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी किस तारीख को मनाई जाएगी और पूजा के लिए शुभ समय क्या रहेगा।

2026 में गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी?
हिंदू पंचांग के मुताबिक भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर होगी। वहीं चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा मुख्य रूप से मध्याह्न काल में करने की परंपरा है।
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गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा का शुभ समय - फोटो : freepik
गणेश चतुर्थी 2026 की पूजा का शुभ समय
14 सितंबर को गणपति पूजा के लिए मध्याह्न काल में सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक शुभ समय रहेगा। इस दौरान भक्त गणेश जी की पूजा-अर्चना करने के साथ उनकी प्रतिमा की स्थापना भी कर सकते हैं।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। गणपति प्रतिमा और कलश स्थापना के लिए इस समय को शुभ माना जाता है।

वहीं, गणेश चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 53 मिनट से 15 सितंबर की रात 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।
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गणेश चतुर्थी पर भद्रा का साया - फोटो : freepik
गणेश चतुर्थी पर भद्रा का साया
इस बार गणेश चतुर्थी के दिन भद्रा भी रहेगी, लेकिन राहत की बात यह है कि इसका समय गणेश पूजा और प्रतिमा स्थापना के शुभ मुहूर्त से अलग है। पंचांग के अनुसार, भद्रा 14 सितंबर की शाम 7 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दौरान भद्रा का वास पाताल लोक में बताया गया है।

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गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को क्यों नहीं देखना चाहिए? - फोटो : freepik
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को क्यों नहीं देखना चाहिए?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। पंचांग के अनुसार, 14 सितंबर को चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 6 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त रात 8 बजकर 4 मिनट पर होगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठे या गलत आरोप लगने का संकट आ सकता है। इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन न करने की परंपरा है।
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गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व - फोटो : freepik
गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। गणपति को विघ्नहर्ता और शुभता प्रदान करने वाला देवता माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के रास्ते खुलते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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