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Ganesh Sthapana 2022: आज घर-घर विराजेंगे मंगलमूर्ति, जानिए गणेश प्रतिमा स्थापना के नियम और पूजा विधि

Wed, 31 Aug 2022 12:45 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Ganesh Chaturthi 2022: भाद्रपद गणेश चतुर्थी को विनाय चतुर्थी, कलंक चतु्र्थी और डण्डा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। - फोटो : अमर उजाला
Ganesh Sthapana Rules And Puja Vidhi: आज 31 अगस्त, बुधवार से 10 दिनों तक चलने वाला गणेशोत्सव पर्व शुरू होने जा रहा है। गणेशोत्सव 31 अगस्त से 09 सितंबर तक चलेगा, जहां पर आज पहले दिन यानी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर घर-घर भगवान गणपति विराजेंगे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्र काल में स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। भाद्रपद गणेश चतुर्थी को विनाय चतुर्थी, कलंक चतु्र्थी और डण्डा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। यहां पर बड़े-बड़े पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश  विद्या,बुद्धि,विघ्नहर्ता, विनाशक, मंगलकारी,सिद्धिदायक और समृद्धिदाता के प्रतीक हैं। आइए जाते हैं 31 अगस्त से शुरू होने वाले गणेशोत्सव की खास बातें...
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गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
गणेश प्रतिमा स्थापना के नियम
भगवान गणेश को विध्नहर्ता और समृद्धि दाता देव माना गया है। घर पर भगवान गणेश की एक या दो ही मूर्तियां रखनी चाहिए। भूलकर भी तीन की संख्या में गणेश की मूर्ति की स्थापना नहीं करनी चाहिए। कभी भी खंडित गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी चाहिए।
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गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
भगवान गणेश जल तत्व के देवता माने गए हैं और यह उन चार देवी-देवताओं में हैं जो दक्षिणमुखी हो सकते हैं। भगवान गणेश के अलावा हनुमानजी, भैरवजी और देवी मां की मूर्तियों का मुख ही दक्षिण दिशा में हो सकती है। इन चार देवताओं के अलावा अन्य किसी देवी या देवता की मूर्ति का मुख दक्षिण में नहीं होना चाहिए।

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Ganesh Chaturthi - फोटो : iStock
घर पर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि मूर्ति में उनकी सूंड की दिशा किस ओर है। वास्तु के अनुसार दाहिनी तरफ सूंड वाले भगवान को सिद्धिविनायक जबकि बाईं ओर की सूंड वाले गणेशजी को वक्रतुंड कहा जाता है। ऐसे में अगर आप गणेश चतुर्थी पर अपने घर में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करने जा रहे हैं तो वक्रतुंड गणेश प्रतिमा करना ज्यादा शुभ होता है। क्योंकि वक्रतुंड गणेशजी की पूजा के नियम आसान और कम होते हैं।
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गणपति मंदिर - फोटो : Pixabay
भगवान गणेश को दूर्वा अति प्रिय होती है ऐसे में गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति की पूजा में दूर्वा घास को जरूर रखें। गणेशजी को दूर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाना चाहिए।ऐसी मान्यता है कि दूर्वा से गणेशजी के पेट की जलन शांत हुई थी। इसी कारण से भगवान गणेश की पूजा-उपासना में उनको दूर्वा अर्पित करते हैं।
 
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गणेश चतुर्थी 2022 की शुभकामनाएं
गणेशजी की पूजा उपासना में ऊँ गं गणपतयै नम: या श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। 
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गणेश चतुर्थी 2022 के बधाई संदेश - फोटो : Pixabay
भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजे जाने वाले देवता हैं। किसी भी तरह की पूजा या अनुष्ठान में सबसे पहले गणपति पूजा का विधान होता है। ऐसे में गणेश चतु्र्थी पर भगवान गणेश की पूजा के साथ भगवान शिव-पार्वती की पूजा करना न भूलें। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर माता-पिता के साथ गणेशजी की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं।
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