फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yogini Ekadashi 2026: जुलाई का पहला एकादशी व्रत कब रखा जाएगा? जानें तिथि, पूजा विधि और नियम

Sun, 05 Jul 2026 03:59 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Ekadashi July 2026 Date: मान्यता यह भी है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि योगिनी एकादशी किस दिन मनाई जाएगी।
विज्ञापन
1 of 5
योगिनी एकादशी 2026 तिथि, पूजा विधि और व्रत के नियम - फोटो : AI
Yogini Ekadashi 2026 Date: आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद पाता है। मान्यता यह भी है कि इस एकादशी का व्रत करने से हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में योगिनी एकादशी किस दिन पड़ रही है।
विज्ञापन

2 of 5
योगिनी एकादशी 2026 तिथि  - फोटो : freepik
योगिनी एकादशी 2026 तिथि 
तिथि की बात करें तो एकादशी तिथि की शुरुआत 09 जुलाई को शाम 07 बजकर 46 मिनट से होगी और इस तिथि का समापन 10 जुलाई को शाम 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

पारण समय
व्रत का पारण 11 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा।
विज्ञापन

3 of 5
पूजा-विधि - फोटो : adobe stock
पूजा-विधि
  • इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें। 
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, फल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करें। 
  • इसके पश्चात “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। 
  • साथ ही विष्णु सहस्रनाम या श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है। 
  • दिनभर व्रत का पालन करें और रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ भगवान का स्मरण करें।

4 of 5
व्रत के नियम - फोटो : adobe
व्रत के नियम
  • व्रत के दौरान सात्विक आचरण का विशेष महत्व होता है। 
  • इस दिन क्रोध, झूठ, निंदा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। 
  • चावल और अन्य अनाज का सेवन वर्जित माना जाता है। 
  • व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या जल के साथ व्रत रख सकता है। 
  • द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय पर पारण कर व्रत का समापन करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
योगिनी एकादशी का महत्व - फोटो : adobe stock
योगिनी एकादशी का महत्व
धार्मिक दृष्टि से योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति का आगमन होता है। सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा दिलाता है, जिससे जीवन में उन्नति और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: रथ निर्माण से बहुड़ा यात्रा तक जानें पूरी परंपरा और रीति-रिवाज
Gayatri Mantra: गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है? जानिए इसकी अद्भुत शक्ति, महत्व और 8 फायदे

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें