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दशहरा 2026: 20 या 21 अक्तूबर कब मनाई जाएगी विजयदशमी? जानें रावण दहन का शुभ मुहूर्त और महत्व

Fri, 16 Oct 2026 12:46 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

वर्ष 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक पड़ने के कारण पर्व की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम है। आइए जानते हैं दशहरा कब मनाया जाएगा और रावण दहन के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा।
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दशहरा 2026 - फोटो : AI
हिंदू पंचांग में विजयदशमी यानी दशहरा का पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह त्योहार धर्म की अधर्म पर जीत का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का अंत कर बुराई पर अच्छाई की विजय स्थापित की थी। इस घटना की याद में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।

दशहरा शारदीय नवरात्र के समापन का भी प्रतीक है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और व्रत करने वाले श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत का पारण करते हैं। वर्ष 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक पड़ने के कारण पर्व की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम है। आइए जानते हैं दशहरा कब मनाया जाएगा और रावण दहन के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा।
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दशहरा 2026 की सही तारीख क्या है? - फोटो : Adobe Stock
दशहरा 2026 की सही तारीख क्या है?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल दशमी तिथि का आरंभ 20 अक्तूबर , मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 21 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा।

सामान्य तौर पर हिंदू त्योहारों की तारीख निर्धारित करने में उदया तिथि का विशेष ध्यान रखा जाता है। हालांकि, विजयदशमी के अवसर पर विजय मुहूर्त और प्रदोष काल का भी धार्मिक महत्व है। इन मुहूर्तों को ध्यान में रखते हुए दशहरा 20 अक्तूबर 2026 को मनाना शुभ माना जा रहा है। इस दिन रावण दहन और विजयदशमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
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दशहरा 2026 रावण दहन का शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock
दशहरा 2026 रावण दहन का शुभ मुहूर्त
विजयदशमी पर शुभ समय में पूजा करना और रावण दहन करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:

विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से शाम 3:30 बजे तक
प्रदोष काल की शुरुआत: शाम 5:47 बजे
श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 19 अक्तूबर, शाम 3:38 बजे
श्रवण नक्षत्र समाप्त: 20 अक्तूबर, शाम 6:02 बजे
निशिता मुहूर्त: रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक

धार्मिक परंपराओं में रावण दहन के लिए प्रदोष काल को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए 20 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट के बाद स्थानीय परंपरा और आयोजन के अनुसार रावण दहन किया जा सकता है।

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विजयदशमी का धार्मिक महत्व - फोटो : freepik
विजयदशमी का धार्मिक महत्व
विजयदशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला पर्व भी है। रामायण की मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण को पराजित करके यह संदेश दिया कि शक्ति और अहंकार के बावजूद अधर्म की अंततः हार होती है।
 
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विजयदशमी का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe
रावण के दस सिर को अक्सर मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है। पुतला दहन इन बुराइयों को त्यागने और सकारात्मक गुण अपनाने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि दशहरा भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग परंपराओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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