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विजयादशमी 2026: दशहरा पर कब करें पूजा और किस समय रावण दहन, जानें इससे जुड़ी बड़ी बातें

Sat, 17 Oct 2026 07:29 PM IST
Shikhar Baranawal धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vijayadashami Puja Muhurat: विजयादशमी यानी दशहरा पर रावण दहन को लेकर सभी में भारी उत्साह रहता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण दहन भी एक तय शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए। आइए, इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि इस बार रावण दहन का सही समय क्या है और साथ ही इससे जुड़ी कुछ मुख्य व जरूरी बातों को भी जानते हैं।
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दशहरा 2026 रावण दहन समय - फोटो : AI
Dussehra 2026 Ravana Dahan Timing: सनातन धर्म में असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में विजयादशमी यानी दशहरा का पावन पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन देश भर में भगवान राम की जीत की खुशी में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। बहुत से लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर रावण दहन का शुभ मुहूर्त क्या है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में दशहरा का यह महान पर्व 20 अक्तूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। चूंकि इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए इसके तुरंत बाद दशमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। इसी वजह से इस बार दशहरा और रावण दहन दोनों एक ही दिन संपन्न किए जाएंगे। आइए इस लेख में इससे जुड़ी पांच बड़ी बातें जानते हैं।
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रावण दहन का सही समय और शाम का मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
रावण दहन का सही समय और शाम का मुहूर्त
  • दशहरा के दिन रावण दहन हमेशा प्रदोष काल और सूर्यास्त के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है। 
  • पंचांग के अनुसार, 20 अक्तूबर को सूर्यास्त शाम 05:47 PM पर होगा। इसलिए रावण दहन का सबसे उत्तम समय शाम 05:47 PM से रात 08:23 PM के बीच रहेगा।
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शस्त्र पूजा और अपराजिता पूजन का विशेष विधान - फोटो : अमर उजाला
शस्त्र पूजा और अपराजिता पूजन का विशेष विधान
  • विजयादशमी के दिन मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की पूजा के साथ-साथ शस्त्रों की पूजा करने का भी विधान है।
  • इसके अलावा ईशान कोण में जाकर अपराजिता पौधे की पूजा करना और शमी के पेड़ के दर्शन करना जीवन में विजय और सफलता का प्रतीक माना जाता है।

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दशहरा नीलकंठ पक्षी महत्व - फोटो : AI
दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन करना बेहद शुभ और भाग्यशाली माना जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसके रुके हुए कार्य तेजी से पूरे होने लगते हैं।
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बुराई का त्याग और जीवन में नई शुरुआत का संकल्प - फोटो : Adobe Stock
बुराई का त्याग और जीवन में नई शुरुआत का संकल्प
  • बाहरी रूप से रावण के पुतले को जलाने के साथ ही यह पर्व हमें अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और बुराइयों का त्याग करने की प्रेरणा देता है।
  • दशहरा का असली संदेश यही है कि हम सच्चाई और सदाचार के मार्ग पर चलकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
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