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दशहरा 2019: धरती और स्वर्ग का अंतर खत्म कर देना चाहता था रावण

Wed, 02 Oct 2019 02:55 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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दशहरा का पावन पर्व अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाया जाता है। 8 अक्टूबर मंगलवार को विजयादशमी का त्योहार मनाया जाएगा। धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। रावण महापंडित और महाज्ञानी था उसने अपने बल से देवताओं को भी पराजित कर दिया था। लेकिन रावण से एक भूल हो गयी थी। वह अपने बल और ज्ञान के अहंकार में खुद को ही भगवान मान बैठा था और ईश्वर के बनाए नियमों में बदलाव करना चाहता था। अगर रावण कुछ साल और जीवित रहता तो अपने 7 अधूरे कामों को पूरा करके दुनिया का स्वरुप ही बदल देता। आइए जानते हैं रावण के वह सात अधूरे काम क्या हैं।

 
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रावण का सबसे पहला सपना यह था कि वह धरती से स्वर्ग तक एक सीढ़ी का निर्माण करे। वह चाहता था कि हर व्यक्ति स्वर्ग में जाए इसलिए रावण ने धरती से लेकर स्वर्ग तक सीढ़ियां बनाने का काम शुरू कर दिया था। लेकिन जब तक यह सीढ़ी बनकर तैयार होती, भगवान राम ने रावण का वध कर दिया था।

 
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रावण का दूसरा सपना था समुद्र के पानी को मीठा करना। रावण को पता था कि पृथ्वी पर पीने का पानी कम है। अगर समुद्र का पानी मीठा हो जाए तो पीने के पानी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

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ravan - फोटो : ravan
रावण का तीसरा अधूरा काम सोने में सुगंध भरना था। इसकी वजह यह थी कि रावण सोने का शौकीन था और उसने अपनी पूरी नगरी भी सोने की बनाई थी। रावण चाहता था कि सोने में सुगंध आ जाए ताकि उसे कहीं भी सुगंध से जान लिया जाए। ऐसा करने से सोने की तलाश भी आसान हो जाती।

 
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रावण का चौथा सपना था रंगभेद को खत्म करना। रावण स्वंय काला था, इसलिए वह चाहता था कि सभी लोग गोरे दिखें और कोई किसी का भी सांवले रंग को लेकर मजाक न बनाएं।
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रावण - फोटो : amar ujala
रावण का पांचवा स्वप्न था खून के रंग को सफेद करना। रावण ऐसा इसलिए करना चाहता था ताकि उसके द्वारा किए जाने वाली हत्या का पता किसी को न चलें।
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रामलीला के दौरान राम और रावण का संवाद। - फोटो : फोटो साभार- पीटीआई
रावण अगर कुछ दिन और जीवित रहता तो अपना छठा सपना भी पूरा कर लेता। वह मदिरा को गंधहीन बना देना चाहता था, जिससे सभी लोग मदिरापान का आनंद ले सकें।
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दशहरा - फोटो : ANI
रावण का सातवां और आखिरी सपना यह था कि संसार में भगवान की पूजा बंद हो जाएं और लोग उसकी पूजा करें। लेकिन रावण का यह सपना उसके साथ ही जल कर राख हो गया।
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