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Durga Ashtami 2025: क्या होती है संधि पूजा ? जानें विधि, मुहूर्त और इसका महत्व

Tue, 30 Sep 2025 12:35 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sandhi Puja On Durga Ashtami 2025: चैत्र, गुप्त या शारदीय नवरात्रि में अष्टमी के दिन संधि पूजा की जाती है। इस पूजा का खास महत्व माना गया है। संधि पूजा दुर्गा अष्टमी पूजा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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Sandhi Puja On Durga Ashtami 2025 - फोटो : Amar Ujala
Sandhi Puja On Durga Ashtami 2025: चैत्र, गुप्त या शारदीय नवरात्रि में अष्टमी के दिन संधि पूजा की जाती है। इस पूजा का खास महत्व माना गया है। संधि पूजा दुर्गा अष्टमी पूजा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पूजा महाअष्टमी और महानवमी के बीच के संधिकाल में की जाती है। चलिए जानते हैं इसे विस्तार से...

क्या होती है संधि पूजा?
यह पूजा ठीक उस समय होती है, जब अष्टमी तिथि समाप्त होकर नवमी तिथि शुरू होती है। अर्थात संधि पूजा अष्टमी तिथि की समाप्ति तथा नवमी तिथि के आरम्भ होने के समय बिन्दु पर की जाती है। संधि पूजा में अष्टमी समाप्त होने के अंतिम 24 मिनट और नवमी प्रारंभ होने के शुरुआती 24 मिनट के समय को संधि काल कहते हैं। यह कुल 48 मिनट का एक शुभ मुहूर्त होता है। इस समय को बहुत ही शुभ और शक्तिशाली माना जाता है।
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संधि पूजा करने से अष्टमी की महागौरी और नवमी की सिद्धिदात्री अर्थात दोनों ही देवियों की एक साथ पूजा हो जाती है। - फोटो : अमर उजाला
संधि पूजा मुहूर्त
30 सितंबर 2025 मंगलवार को संधि पूजा का मुहूर्त शाम 05:42 से 06:30 के बीच रहेगा।

संधि पूजा का क्या है महत्व?
संधि पूजा करने से अष्टमी की महागौरी और नवमी की सिद्धिदात्री अर्थात दोनों ही देवियों की एक साथ पूजा हो जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी संधिकाल में देवी दुर्गा ने असुरों के सेनापतियों चंड और मुंड का वध किया था। उसके बाद अगले दिन महिषासुर का वध किया था। यह समय दुर्गा पूजा और हवन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यह पूजा भक्तों को दैवीय शक्ति और आशीर्वाद से जोड़ती है।
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संधि पूजा की सामग्री क्या है ? - फोटो : freepik
संधि पूजा की सामग्री
108 कमल के फूल (या लाल गुड़हल के फूल), 108 बेलपत्र, 108 मिट्टी के दीये, हवन के लिए सामग्री (आम की लकड़ी, घी, हवन सामग्री), चुनरी, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, और भोग (खीर, मिठाई, फल), एक विशेष बलि के रूप में कद्दू या केले का प्रयोग करें। यदि आप 108 फूल नहीं मिलते हैं तो श्रद्धा अनुसार 8, 16, या 24 फूल एकत्रित कर सकते हैं।

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संधि पूजा के दौरान कुछ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जो आमतौर पर 48 मिनट में ही पूर्ण करने होते हैं। - फोटो : freepik
संधि पूजा कैसे करते हैं?

साफ सफाई
पूजा स्थल को साफ करके, वहां मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें। देवी का आह्वान करें और उनसे पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें।

48 मिनट का महत्व
संधि पूजा के दौरान कुछ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जो आमतौर पर 48 मिनट में ही पूर्ण करने होते हैं।

108 कमल के फूल
देवी को 108 कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं। हर फूल अर्पित करते समय "ॐ दुं दुर्गायै नमः" मंत्र का जाप करें। ये कमल के फूल पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक हैं।
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पूजा के दौरान देवी दुर्गा की आरती की जाती है और विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। - फोटो : freepik
108 जलते हुए दीये
संधि काल शुरू होने पर, 108 दीये जलाएं। इन दीयों को पूजा स्थल के चारों ओर रखें। 108 दीये जलाए जाते हैं, जो ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक हैं।

बलि
पूजा में भुरा कद्दू जैसी चीजें अर्पित की जाती हैं। यह बुराई को छोड़ने और दैवीय शक्ति को स्वीकार करने का प्रतीक है।

षोडशोपचार
इसके बाद देवी का षोडशोपचार पूजन करें। इस दौरान उन्हें नैवेद्य अर्पित करें और सभी तरह के भोग लगाएं।

आरती और मंत्रोच्चार
पूजा के दौरान देवी दुर्गा की आरती की जाती है और विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। आरती में माता महागौरी और सिद्धिदात्री दोनों की आरती करें। अंत में सभी को प्रसाद वितरण करें।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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