फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Govardhan Puja Timing 2022: गोवर्धन पूजा आज, जानें विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा

Wed, 26 Oct 2022 05:33 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
गोवर्धन पूजा कब है? जानें विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा - फोटो : अमर उजाला
Govardhan Puja 2022 : हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है। यानी दिवाली अगले दिन ये पर्व मनाया जाता है। इस बार दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच में सूर्य ग्रहण लगा था। ऐसे में सूर्यग्रहण के कारण इस साल दिवाली के अगले दिन 25 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा नहीं हो सकी। सूर्य ग्रहण की वजह से गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर को है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाती हैं और उसकी पूजा करती हैं। चलिए जानते हैं कि इस बार दीपावली के एक दिन बाद क्यों मनाया जाएगा गोवर्धन पूजा का पर्व, इसकी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…

Dhanteras 2022 Date: इस साल धनतेरस कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और विधि
विज्ञापन

2 of 4
गोवर्धन पूजा कब है? जानें विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा - फोटो : iStock
गोवर्धन पूजा मुहूर्त 
इस साल 26 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है। ये तिथि 26 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 29 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।  
विज्ञापन

3 of 4
गोवर्धन पूजा कब है? जानें विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा - फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन पूजा विधि
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह काल जल्दी उठकर स्नानादि करें। फिर शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और साथ ही पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं। इसके बाद धूप-दीप आदि से विधिवत पूजा करें। भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद उनका पूजन करें। इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाएं। 
विज्ञापन

4 of 4
गोवर्धन पूजा कब है? जानें विधि, मुहूर्त, महत्व और कथा - फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन पूजा का महत्व
मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के द्वारा ही सर्वप्रथम गोवर्धन पूजा आरंभ करवाई गई थी और गोवर्धन पर्वत तो अपनी उंगली पर उठाकर इंद्रदेव के क्रोध से ब्रज वासियों और पशु-पक्षियों की रक्षा की थी। यही कारण है कि गोवर्धन पूजा में गिरिराज के साथ कृष्ण जी के पूजन का भी विधान है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें