दीपावली के पहले दिन यानि धनतेरस के दिन लोग सोने-चांदी या नए बर्तन की खरीदारी करते हैं और लक्ष्मी जी के आगे दीये जलाते हैं। नरक चतुर्दशी के दिन मृत्यु के देवता यमराज के लिए असमय मृत्यु के भय से बचने के लिए सारी रात दीपक जलाएं जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था तब से छोटी दीपावली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
दीपावली की रात को घरों में मुख्यता पकवान बनाए जाते है और लक्ष्मी माता को भोग लगाया जाता है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश का पूजन किया जाता है। गोवर्धन के दिन अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों से गोवर्धन की पूजा की जाती है। भैया दूज के दिन बहनें अपने भाईयों का टीका करती हैं और एक दूसरे के जीवन के लिए मंगल कामना करती हैं। इस प्रकार दीपावली के पांचों त्योहारों का अपना महत्त्व है तो आइए जानते है कि इन दिनों पूजा के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए होती है।
पूजा की सामग्री (Puja Samagari of Diwali Puja)
चावल, गुलाल, हल्दी, मेहंदी, चूड़ी, काजल, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान के पत्ते, पुष्पमाला, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्ध घी, दही, दूध, ऋतुफल, गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े, पेड़ा, मालपुए, इलायची(छोटी), लौंग, इत्र की शीशी, कपूर, केसर, सिंहासन, पीपल, आम और पाकर के पत्ते, औषधि जटामॉसी, शिलाजीत, लक्ष्मीजी की मूर्ति, गणेशजी की मूर्ति, सरस्वती का चित्र, चाँदी का सिक्का, लक्ष्मी-गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, जल कलश, सफेद कपड़ा, लाल कपड़ा,पंच रत्न, दीपक, दीपक के लिए तेल, पान का बीड़ा, श्रीफल,कलम, बही-खाता, स्याही की दवात, पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), हल्दी की गाँठ, खड़ा धनिया, खील-बताशे, अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र, धूप बत्ती, चंदन आदि।