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Devuthani Ekadashi 2025: देवउठनी एकादशी आज, यहां जानें पूजन विधि से लेकर शुभ मुहूर्त तक सबकुछ

Sat, 01 Nov 2025 07:31 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु को समर्पित देवउठनी एकादशी 1 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन घरों में भगवान विष्णु की भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसे देवोत्थान भी कहते हैं।
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Devuthani Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला
Devuthani Ekadashi 2025: भगवान विष्णु को समर्पित देवउठनी एकादशी 1 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है। यह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस दिन घरों में भगवान विष्णु की भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसे देवोत्थान भी कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विष्णु भगवान सहित समस्त देवता चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं, जिसके बाद एक बार फिर शुभ मांगलिक कार्यों का प्रारंभ होता हैं। चूंकि श्री हरि जागते हैं, इसलिए एक बार फिर सृष्टि की कमान प्रभु संभालते हैं। हिंदू धर्म में इस तिथि को नई शुरुआत, सुख-सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यदि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाए, तो वे प्रसन्न होकर भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इससे विवाह के योग बनते हैं, कार्यों में सफलता मिलती है। ऐसे में आइए देवउठनी एकादशी के महत्व और पूजन विधि को जानते हैं।
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इस वर्ष कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। - फोटो : Adobe Stock
देवउठनी एकादशी 2025
इस वर्ष कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। इसलिए 1 नवंबर 2025 यानी आज देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी।
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2 नवंबर को दोपहर 1:11 से 03:23 मिनट की अवधि में एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं। - फोटो : Adobe Stock
देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त 
ज्योतिषियों के मुताबिक, आज देवउठनी एकादशी पर शाम 7 बजकर पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा और इस समय देव जागेंगे। ऐसे में पूजा के लिए यह अवधि कल्याणकारी हो सकती हैं। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। वहीं गोधूली मुहूर्त शाम 5 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। साथ ही प्रदोष काल शाम 5 बजकर 36 मिनट पर प्रारंभ होगा।

देवउठनी एकादशी व्रत पारण
2 नवंबर को दोपहर 1:11 से 03:23 मिनट की अवधि में एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं।

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देवउठनी एकादशी पर पूजा के लिए आप घर के पूजा स्थल के पास गेरू से भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाएं। - फोटो : adobe stock
देवउठनी एकादशी पूजा विधि
  • देवउठनी एकादशी पर पूजा के लिए आप घर के पूजा स्थल के पास गेरू से भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनाएं।
  • आकृति के पास फल, सिंघाड़ा पीली रंग की मिठाई, गन्ना, फूल रखें। इसके बाद आप इस आकृति को छन्नी या डलिया से ढक दें।
  • शाम को आकृति के पास शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं। फिर भगवान विष्णु संग देवी लक्ष्मी और सभी देवी-देवताओं की पूजाकरें।
  • अब शंख या घंटी बजाएं और 'उठो देवा, बैठो देवा' के भजन से श्री हरि को जगाएं।
  • देवताओं को जगाने के बाद सभी को पंचामृत का भोग लगाएं और सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • इस दौरान यदि आप तुलसी विवाह कर रहे हैं, तो उनकी भी पूजा करें।
  • फिर सभी में प्रसाद का वितरण करें और कुछ वस्त्र, धन, अन्न व पीली चीजों का दान करें।
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Dev Uthani Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला
देवउठनी एकादशी भोग
  • गुड़ और चने का भोग लगाएं।
  • पंचामृत का भोग लगाएं।
  • पंजीरी का भोग ।
  • केले का भोग।
  • पीली मिठाई का भोग।

देवउठनी एकादशी उपाय
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवउठनी पर आप सुहाग सामग्री का दान करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
  • इस दिन तुलसी पर कच्चा दूध चढ़ाएं। फिर पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
  • देवउठनी एकादशी पर आप गर्म और ऊनी वस्त्रों का दान करें। इससे भाग्योदय होता है।
  • देवउठनी एकादशी पर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और घर में लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। इससे सकारात्मकता का आगमन होता है।
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भगवान विष्णु की आरती - फोटो : adobe
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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