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Dahi Handi 2026: दही हांडी में 9 की संख्या का क्या है रहस्य? कृष्ण जन्माष्टमी की अनोखी परंपरा

Thu, 03 Sep 2026 01:44 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Dahi Handi 2026: जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला दही हांडी उत्सव भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दही हांडी में 9 की संख्या इतनी खास क्यों मानी जाती है? जानें 9-स्तरीय मानव पिरामिड और इस अनोखी परंपरा का रहस्य।
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krishna janmashtami 2026 - फोटो : amar ujala

Dahi Handi 2026: भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही हांडी उत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान गोविंदा की टोलियां ऊंचाई पर बांधी गई मटकी को फोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाती हैं। दही हांडी में कई स्तरों वाला मानव पिरामिड बनाना इस उत्सव की सबसे रोमांचक परंपराओं में से एक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दही हांडी में 9 की संख्या इतनी खास क्यों मानी जाती है? आधुनिक दही हांडी प्रतियोगिताओं में 9-स्तरीय मानव पिरामिड को बेहद चुनौतीपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। वहीं धार्मिक परंपरा में भी 9 अंक को विशेष महत्व दिया गया है। आइए जानते हैं दही हांडी और 9 की संख्या के बीच क्या संबंध है।

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दही हांडी - फोटो : free pik

दही हांडी 2026 कब मनाई जाएगी?
दही हांडी जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है। वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है, इसलिए दही हांडी उत्सव 5 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात और देश के कई अन्य हिस्सों में इस दिन बड़े स्तर पर दही हांडी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गोविंदा की टीमें ऊंचाई पर लटकी मटकी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाती हैं और मटकी फोड़कर उत्सव मनाती हैं।

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दही हांडी में 9 की संख्या क्यों खास है? - फोटो : एएनआई

दही हांडी में 9 की संख्या क्यों खास है?
दही हांडी में 9 का महत्व दो अलग संदर्भों में समझा जाता है। मानव पिरामिड की चुनौती और धार्मिक प्रतीकात्मकता। प्रतियोगिताओं में 9 स्तरों का पिरामिड बनाना बेहद कठिन माना जाता है। पिरामिड के सबसे ऊपर एक छोटा और हल्का गोविंदा चढ़ता है, जिसे अक्सर बाल कृष्ण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वह ऊपर पहुंचकर मटकी फोड़ता है। यही वजह है कि 9-स्तरीय पिरामिड को दही हांडी प्रतियोगिताओं में एक बड़ी उपलब्धि और अंतिम चुनौती के रूप में देखा जाता है।

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9वें स्तर पर ही बच्चा क्यों चढ़ता है? - फोटो : PTI

9वें स्तर पर ही बच्चा क्यों चढ़ता है?
मानव पिरामिड की सबसे ऊपरी मंजिल पर आमतौर पर टीम का सबसे हल्का और छोटा सदस्य चढ़ता है। इसके पीछे व्यावहारिक कारण है। ऊपर का वजन जितना कम होगा, पिरामिड को संतुलित रखना उतना आसान होता है। धार्मिक प्रतीक के रूप में इस बच्चे को बाल गोपाल या बाल कृष्ण से जोड़ा जाता है। सबसे ऊपर पहुंचने के बाद वह मटकी को फोड़ता है और नीचे खड़े गोविंदाओं की पूरी टीम उत्सव मनाती है।

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क्या 9 का धार्मिक महत्व भी है? - फोटो : adobe stock

क्या 9 का धार्मिक महत्व भी है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में 9 अंक को पूर्णता और विशेष आध्यात्मिक महत्व से जोड़ा जाता है। सनातन परंपरा में 9 से जुड़े कई उदाहरण मिलते हैं, जैसे:

  • नवग्रह
  • नवरात्रि
  • नवधा भक्ति
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दही हांडी में मानव पिरामिड - फोटो : adobe stock

धार्मिक परंपराओं में 9 प्रकार या 9 रूपों का उल्लेख
कुछ धार्मिक व्याख्याओं में दही हांडी के 9 स्तरों को केवल एक खेल या प्रतियोगिता नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि दही हांडी में 9 स्तर रखने का कोई एक सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। यह संख्या आधुनिक प्रतियोगिताओं और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में अधिक प्रमुख दिखाई देती है।

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भगवान कृष्ण से दही हांडी का क्या संबंध है? - फोटो : amar ujala

भगवान कृष्ण से दही हांडी का क्या संबंध है?
दही हांडी को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं में कृष्ण को माखन और दही बेहद प्रिय बताया गया है। मान्यता है कि बाल कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर घरों में रखे माखन को पाने की कोशिश करते थे। ऊंचाई पर रखी मटकी तक पहुंचने के लिए बच्चों की टोली एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती थी। इसी बाल लीला की याद में दही हांडी उत्सव की परंपरा विकसित हुई मानी जाती है।

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दही हांडी में मानव पिरामिड क्यों बनाया जाता है? - फोटो : amar ujala

दही हांडी में मानव पिरामिड क्यों बनाया जाता है?
दही हांडी में मटकी को जमीन से काफी ऊंचाई पर बांधा जाता है। उसे तोड़ने के लिए गोविंदा एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर पिरामिड बनाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सामूहिक प्रयास, साहस, संतुलन और टीमवर्क का प्रतीक मानी जाती है। एक व्यक्ति अकेले मटकी तक नहीं पहुंच सकता। पूरी टीम को एक साथ सही तालमेल के साथ आगे बढ़ना पड़ता है। यही दही हांडी की सबसे खास बातों में से एक है।

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दही हांडी और कृष्ण जन्माष्टमी की परंपरा में गोपालकाला का विशेष महत्व माना जाता है। - फोटो : amar ujala

क्या है गोपालकाला?
दही हांडी और कृष्ण जन्माष्टमी की परंपरा में गोपालकाला का विशेष महत्व माना जाता है। इसे विभिन्न खाद्य पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाने वाला प्रसाद माना जाता है। इसमें दही, पोहा, माखन, फल और अन्य सामग्री शामिल की जा सकती है। गोपालकाला को मिल-बांटकर खाने की परंपरा सामूहिकता और समानता का संदेश देती है। इसमें सभी लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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