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Chaitra Navratri 2021: कोरोना काल में घर पर कैसे करें नवरात्रि पूजा, जानें घटस्थापना की संपूर्ण विधि और मंत्र

Tue, 13 Apr 2021 06:37 AM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
आज से शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहें हैं। सभी देशवासियों को माता यानि शक्ति की उपासना आराधना पूर्ण संयम के साथ करनी चाहिए और इस कोरोना रूपी महिषासुर के समूल नाश के लिए माता भगवती का आवाह्न करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार वर्तमान परिवेश में देखा जाये तो तो आज हम कोरोना रूपी संकट से संघर्ष कर रहे हैं। हमें इन नौ दिनों में अपने अंदर ऐसी उर्जा को जाग्रत करना है जिससे हम कोरोना का पूर्ण विनाश कर सकें और इसके लिए आत्म संयम का पालन अनिवार्य है। हमारे शास्त्रों में देश, काल परिस्थिति के अनुसार कार्य करने को कहा गया है। वर्तमान में देश की परिस्थिति के अनुसार घर में रहना भी संयम और साधना का एक अंग है।
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : social media
अष्टमी और नवमी में हवन व कन्या का विधान
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के हवन और कन्या पूजन का विधान हैं। देश, काल, परिस्थिति के अनुसार इस वर्ष भक्तगण अपने घर में कलश स्थापना, हवन, यज्ञ का अनुष्ठान करें और कन्या पूजन में किसी संस्था के माध्यम से कन्याओं को कुछ जरूरी सामान दान करें। जो मंदिरों के दानपात्र में दान देते थे वे कुछ गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन के माध्यम से दान करें लेकिन यह सब सामाजिक दूरी बनाकर ही करें।


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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
करें गुप्त दान
शास्त्रों में कहा गया है कि दान का फल तभी मिलेगा जब दाहिने हाथ से किया हुआ दान बांये हाथ को भी पता न चले तभी यह दान रूपी यज्ञ सफल होगा और इस महिषासुर रूपी कोरोना का विनाश होगा और पूर्ण विश्वास रखें हमारी साधना, यज्ञ, दान के प्रतिफल में माता भगवती इस कोरोना रूपी महिषासुर का निश्चित विनाश करेंगी।

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना का विधान 
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां के नौ स्वरुपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। ये नौ दिन शक्ति को समर्पित किए जाते हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना (कलश स्थापित) की जाती है। कलश को गणेश जी का प्रतीक माना जाता है इसलिए सर्वप्रथम कलश स्थापना करके उसका पूजन किया जाता है। जल से भरे हुए कलश को सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। 
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
वास्तु के नियमानुसार करें घटस्थापना
वास्तु में पूजा करने के स्थान के बारे में भी दिशा का महत्व बताया गया है इसलिए कलश की स्थापना और मां की चौकी लगाते समय भी दिशा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। जानते हैं कलश स्थापना कैसे और किस दिशा में करनी चाहिए। 
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
कलश स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार घर के ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा को पूजा का सही स्थान माना जाता है। इस दिशा को देवताओं की दिशा माना गया है इसलिए इस दिशा में सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है। नवरात्रि में मां की प्रतिमा और घटस्थापना घर के उत्तर-पूर्व दिशा में करें। 
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : gettyimages
कलश स्थापना विधि
कलश स्थापित करने से पहले उस स्थान को स्वच्छ करके गंगाजल से पवित्र करें। उसके बाद कलश के ऊपर स्वास्तिक का चिह्न बनाए और कलश में जल भरें। अब कलश के मुख की किनारी की ओर मौली को लपेटे तत्पश्चात् कलश में सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें। मिट्टी में जौं मिलाकर पूजा स्थान के पास ही लकड़ी की चौकी पर वेदी बनाएं और कलश को स्थापित करें। कलश के ऊपर लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेट कर रखें। आप मिट्टी, चांदी या फिर तांबे का कलश ले सकते हैं। 

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
9 दिन में करें मां के नौ रूपों की पूजा
अपने कुल देवी देवता की पूजा के साथ-साथ नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना अर्थात घट स्थापना के साथ ही नवरात्र की शुरूआत होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री तो दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, तो पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। छठे दिन मां कात्यायनी एवं सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। आठवें दिन महागौरी तो नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : डेमो
मनोकामना पूर्ति के लिए करें इस मंत्र का जाप
शुद्ध पवित्र आसन ग्रहण कर ॐ दुं दुर्गाये नमः मंत्र का रुद्राक्ष या चंदन की माला से पांच या कम से कम एक माला जाप कर अपना मनोरथ निवेदित करें। पूरी नवरात्रि प्रतिदिन इस मंत्र के जप से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। 

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
सावधानियां
कई बार ऐसा होता है कि विधानपूर्वक पूजा करने पर भी वांछित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती। भक्तों को यह ध्यान रखना चाहिए कि दुर्गा जी की पूजा में दूर्वा, तुलसी, आंवला आक और मदार के फूल अर्पित नहीं किए जाते हैं। लाल रंग के फूलों प्रयोग करें। मां दुर्गा की पूजा सूखे वस्त्र पहनकर ही करनी चाहिए, गीले कपड़े पहनकर नहीं। अक्सर देखने में आता है कि महिलाएं बाल खुले रखकर पूजन करती हैं, जो निषिद्ध है। विशेष कर दुर्गा पूजा या नवरात्रि में हवन, पूजन और जप आदि के समय उन्हें बाल खुले नहीं रखने चाहिए।

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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
दुर्गा सप्तशती की महिमा
सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत् पाठ से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

सर्वकल्याण के लिए
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।

बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। 
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।

आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्ति के लिए
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजही ||
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चैत्र नवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
इस दिशा में लगाएं ध्वजा
नवरात्रि के दिनों में लोग अपने घर की छत पर ध्वजा भी लगाते हैं। ध्वजा को लगाते समय भी दिशा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। वास्तु के अनुसार ध्वजा की स्थापना उत्तर-पश्चिम दिशा में करनी चाहिए।
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