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ईस्टर संडे: किन लोगों के लिए वापस जीवित हुए थे प्रभु ईशु, जानिए ईस्टर का महत्व

Sun, 01 Apr 2018 07:28 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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गुड फ्राइडे के बाद ईसाई समुदाय के लोगों के लिए ईस्टर संडे का बड़ा महत्व होता है। ईसाई धर्म को मानने वाले लोगो का विश्वास है कि गुड फ्राइडे के तीन बाद यानी संडे को ईसा मसीह सूली पर चढ़ने के बाद दोबारा जीवित हो गए थे। इसी की खुशी में ईसाई समुदाय इस दिन को बडे़ धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस मौके पर आइए जानते हैं क्या है ईस्टर संडे का महत्व।   
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ईसाई समुदाय के लोगों की ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्रभु ईसा मसीह सूली को पर लटकाने के बाद दोबारा जीवित होने के बाद 40 दिन तक अपने शिष्यों के बीच रहे थे और अंत में स्वर्ग चले गए।
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ईस्टर आमतौर पर अप्रैल में आता है। इसके पीछे कारण है दरअसल जब जीसस को पकड़ा गया जब इस्राइल में सर्दी जाने और गर्मी के आने का समय था। 

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ईस्टर में अंडे का विशेष महत्व होता है। ईस्टर के दिन अंडों से सजावट की जाती  है क्योंकि अंडे को शुभ माना जाता है। इस दिन लोग एक दूसरों को अंडों को गिफ्ट के रूप में देते है। अंडे नया उत्साह और नई उंमग से भरने का संदेश देता है।
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ईस्टर का उत्सव उषाकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त प्रभु यीशु दोबारा जीवित हुए थे और उन्हें सबसे पहले मरियम मगदलीनी नामक महिला ने देख फिर अन्य महिलाओं को इस बारे में बताया था।
  
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