Govardhan Puja-Bhai Dooj: आज यानी 26 अक्टूबर को भाई दूज और गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। वैसे तो दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन इस साल सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन न होकर 26 अक्टूबर को की जा रही है। ऐसे में गोवर्धन पूजा और भाई दूज एक ही दिन मनाए जाएंगे। गोवर्धन पूजा के दौरान भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है। वहीं भाई दूज के दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी आयु कामना करती हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन यमलोक के लिपिक का कार्य करने वाले देवता चित्रगुप्त, कलम-दवात, पंजिका का भी पूजन किया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं दोनों पर्वों के बारे में खास बातें -
गोवर्धन पूजा और भाई दूज आज, जानें दोनों त्योहारों के बारे में सभी जरूरी और खास बातें
- फोटो : amar ujala
भाई दूज की तिथि
कुछ लोग 26 अक्टूबर, तो वहीं कुछ 27 अक्टूबर को इस त्योहार को मनाने की बात कर रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस साल कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि 26 और 27 अक्टूबर दोनों दिन रहेगी। पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि बुधवार, 26 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर अगले दिन गुरुवार, 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। ऐसे में ज्योतिष जानकारों का कहना है कि भाई दूज का त्योहार दोनों तिथियों पर मनाया सकेगा।
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गोवर्धन पूजा और भाई दूज आज, जानें दोनों त्योहारों के बारे में सभी जरूरी और खास बातें
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भाई दूज 26 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
यदि आप 26 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाने की सोच रहे हैं, तो द्वितीय तिथि प्रारंभ होने के बाद दोपहर 03 बजकर 33 मिनट तक पूजा और तिलक का शुभ मुहूर्त है। पंचांग के अनुसार 26 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 42 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा शाम 05 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 07 मिनट तक गोधुलि मुहूर्त है। ऐसे में यदि आप 26 अक्टूबर को भाई दूज मनाने जा रही हैं, तो इनमें से किसी भी मुहूर्त में भाई को टीका लगा सकती हैं।
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भाई दूज 27 अक्टूबर का शुभ मुहूर्त
वहीं जो लोग 27 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाने की सोच रहे हैं, तो इस दिन 11 बजकर 07 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक पूजा और तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त है। इसके अलावा, सुबह 11 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। ज्योतिष के अनुसार इसमें भाई को तिलक करना बहुत ही शुभ रहेगा।
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भाई का तिलक करने की विधि
मान्यता है कि इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। ऐसे में जो बहने शादी-शुदा हैं उनके भाईयों को अपनी बहन के घर जाना चाहिए। कुंवारी लड़कियां घर पर ही भाई का तिलक करें। भाई दूज के दिन सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं भाई का तिलक करने के लिए पहले थाली तैयार करें उसमें रोली, अक्षत और गोला रखें तत्पश्चात भाई का तिलक करें और गोला भाई को दे दें। फिर प्रेमपूर्वक भाई को मनपसंद का भोजन करवाएं। उसके बाद भाईयों को भी अपनी बहन से आशीर्वाद लेना चाहिए और उन्हें भेंट स्वरूप कुछ उपहार देना चाहिए।
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गोवर्धन पूजा या अन्नकूट कब मनाते हैं?
दिवाली के ठीक अगले दिन अन्नकूट और गोवर्धन पूजा मनाते हैं। लेकिन इस साल सूर्यग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
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गोवर्धन पूजा मुहूर्त
इस साल 26 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है। ये तिथि 26 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 29 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
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गोवर्धन पूजा विधि
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह काल जल्दी उठकर स्नानादि करें। फिर शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और साथ ही पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं। इसके बाद धूप-दीप आदि से विधिवत पूजा करें। भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद उनका पूजन करें। इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाएं।
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गोवर्धन पूजा का महत्व
मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण के द्वारा ही सर्वप्रथम गोवर्धन पूजा आरंभ करवाई गई थी और गोवर्धन पर्वत तो अपनी उंगली पर उठाकर इंद्रदेव के क्रोध से ब्रज वासियों और पशु-पक्षियों की रक्षा की थी। यही कारण है कि गोवर्धन पूजा में गिरिराज के साथ कृष्ण जी के पूजन का भी विधान है। इस दिन अन्नकूट का विशेष महत्व माना जाता है।
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56 भोग का महत्व
भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था, इसलिए सभी ने खुश होकर श्री कृष्ण के लिए 56 प्रकार के भोग तैयार किए थे। तभी से गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को 56 भोग लगाए जाते हैं।