फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhai Dooj 2025:बहन-भाई के प्रेम का प्र्तीक पर्व भाई दूज कल, जानें शुभ मुहूर्त और तिलक विधि

Wed, 22 Oct 2025 03:24 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Bhai Dooj Puja Vidhi: इस वर्ष भाई दूज का पर्व 23 अक्तूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त क्या है और भाई दूज का धार्मिक महत्व क्या है। आइए जानते हैं। 
विज्ञापन
1 of 5
भाई दूज 2025 - फोटो : अमर उजाला
Bhai Dooj 2025 Muhurat: दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का समापन भाई दूज के साथ होता है, जो भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। रक्षाबंधन की ही तरह यह पर्व भी भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत करता है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक कर उसकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई भी बहनों को उपहार देकर अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त करते हैं।
Bhai Dooj 2025: भाई दूज पर क्या है तिलक करने का समय? जानें तिथि, मुहूर्त और मंत्र
कल, 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को भाई दूज का यह पावन पर्व पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका धार्मिक महत्व कितना गहरा है। आइए जानते हैं भाई दूज से जुड़ी परंपराएं, मान्यताएं और शुभ समय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।
Bhai Dooj Pooja Thali: भाई दूज की थाली में जरूर रखें ये चीजें, यहां जानें सम्पूर्ण सामग्री लिस्ट
विज्ञापन

2 of 5
भाई दूज की तिथि 22 अक्तूबर 2025 को रात 08:16 बजे शुरू होकर 23 अक्तूबर 2025 को रात 10:46 बजे तक रहेगी।
कब है तिलक का शुभ दिन?
पंचांग के अनुसार, भाई दूज की तिथि 22 अक्तूबर 2025 को रात 08:16 बजे शुरू होकर 23 अक्तूबर 2025 को रात 10:46 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस बार भाई दूज का पर्व 23 अक्तूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।
विज्ञापन

3 of 5
तिलक का शुभ मुहूर्त
तिलक का शुभ मुहूर्त: दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक
अवधि: कुल 2 घंटे 15 मिनट
इस समय में बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सकती हैं और विधिपूर्वक पूजा कर सकती हैं।

4 of 5
भाई को तिलक लगाने की विधि
भाई को तिलक लगाने की विधि
  • शुभ मुहूर्त में भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बिठाएं।
  • उसके सिर पर एक साफ रुमाल या कपड़ा रखें।
  • फिर रोली और अक्षत (चावल) से तिलक करें।
  • भाई के हाथ में कलावा (मौली) बांधें।
  • उसके बाद मिठाई खिलाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  • अंत में भाई को बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
भाई दूज का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
भाई दूज का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा
भाई दूज की शुरुआत को लेकर एक सुंदर पौराणिक कथा प्रचलित है, जो इस पर्व के भावनात्मक महत्व को दर्शाती है। कहा जाता है कि सूर्य देव की पुत्री यमुनाजी अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं और उन्हें बार-बार अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करती थीं। यमराज अपने कार्यों में व्यस्त होने के कारण नहीं जा पाते थे। एक दिन यमराज अपनी बहन यमुना के आग्रह पर उसके घर पहुंचे। यमुना ने उनका तिलक कर विधिपूर्वक स्वागत किया, स्वादिष्ट पकवान बनाकर उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को वर मांगने को कहा। यमुना ने उनसे वचन लिया कि हर वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वह उनके घर पधारेंगे और इस दिन जो बहनें अपने भाइयों को तिलक करेंगी, उनके भाई दीर्घायु और समृद्ध रहेंगे। यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया और तभी से भाई दूज का पर्व मनाया जाने लगा। इसे "यम द्वितीया" भी कहा जाता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें