सिंदूर खेला और विसर्जन
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5. सिंदूर खेला और विसर्जन
वरण रस्म: विजया दशमी पर माँ दुर्गा को मायके से विदा करने का समय होता है। विवाहित महिलाएँ पारंपरिक लाल-सफ़ेद साड़ी पहनकर देवी की पूजा (वरण) करती हैं, उन्हें सिंदूर, पान और मिठाई अर्पित कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेती हैं।
सिंदूर खेला: पूजा के बाद सभी महिलाएँ आपस में एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं, जिससे पूरा माहौल उत्सव के लाल रंग में रंग जाता है।
बेटी की विदाई का भाव: जैसे किसी बेटी को खुशी-खुशी मायके से ससुराल विदा किया जाता है, वैसे ही ढाक की धुन, शंखनाद और उलूध्वनि के बीच माँ दुर्गा को कैलाश पर्वत के लिए विदाई दी जाती है और प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
- शैली प्रकाश
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