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Basant Panchami 2021: कब है बसंत पंचमी, जानें तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Mon, 01 Feb 2021 07:59 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बसंत पंचमी 2021 - फोटो : अमर उजाला
बसंत पंचमी का पावन पर्व इस साल 16 फरवरी को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष यह पर्व माघ माह शुक्ल की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। आइए जानते हैं बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व।
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बसंत पंचमी 2021 - फोटो : self
बसंत पंचमी 2021 का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी तिथि प्रारंभ - 16 फरवरी को सुबह 03 बजकर 36 मिनट से
बसंत पंचमी तिथि समाप्त - 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक
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बसंत पंचमी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
बसंत पंचमी 2021 की पूजा विधि (Basant Panchami 2021 Puja Viddhi)
  • इस दिन सुबह उठकर शरीर पर उबटन लगाकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें। 
  • अग्र भाग में गणेश जी और पीछे वसंत स्थापित करें। 
  • नए धान्य से जौ, गेहूं आदि की बाली की पुंज को भरे कलश में डंठल सहित रखकर अबीर और पीले फूलों से वसंत बनाएं। 
  • तांबे के पात्र से दूर्वा से घर या मंदिर में चारों तरफ जल छिड़कें और मंत्र पढ़ें- 
  • प्रकर्तत्याः वसंतोज्ज्वलभूषणा नृत्यमाना शुभा देवी समस्ताभरणैर्युता, वीणा वादनशीला च यदकर्पूरचार्चिता। 
  • प्रणे देवीसरस्वती वाजोभिर्वजिनीवती श्रीनामणित्रयवतु।
  • पूर्वा या उत्तर की ओर मुंह किए बैठकर मां को पीले पुष्पों की माला पहनाकर पूजन करें। 
  • गणेश, सूर्य, विष्णु, रति-कामदेव, शिव और सरस्वती की पूजा का विधान भी है। 

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बसंत पंचमी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्वयं के बसंत में प्रकट होने की बात कही है। ब्रह्मवैवर्त पुराण आदि ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन शिव ने पार्वती को धन और संपन्नता की देवी होने का आशीर्वाद दिया था। इसीलिए पार्वती को नील सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन संध्या वेला में 101 बार इस मंत्र का जाप इसीलिए उत्तम माना गया है-

मंत्र -  ऐं हृीं श्रीं नील सरस्वत्यै नमः।।
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ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है। - फोटो : SELF
बसंत पंचमी है शुभ दिन
ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है। 




 
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माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था मां सरस्वती का प्राकट्य। - फोटो : अमर उजाला
बसंत पंचमी की कथा
कहते हैं कि जब भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की तो उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर देवी प्रकट हुईं। देवी के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे ही वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन बसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।
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